डेरा सच्चा सौदा के विज्ञापन पर हाई कोर्ट सख्त, ‘साजिश’ वाले सवाल पर अवमानना का संज्ञान
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा से जुड़े एक विज्ञापन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अखबारों में प्रकाशित विज्ञापन की सामग्री पर अदालत ने आपराधिक अवमानना का स्वत: संज्ञान लिया है। हाई कोर्ट ने प्रथमदृष्टया माना कि विज्ञापन में न्यायपालिका के खिलाफ ऐसे आरोप और संकेत दिखाई देते हैं, जो अदालत की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने या न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप की आशंका पैदा कर सकते हैं।
यह मामला 12 सितंबर 2026 को एक अंग्रेजी और एक हिंदी समाचार पत्र के संबंधित संस्करणों में प्रकाशित विज्ञापन से जुड़ा है। विज्ञापन के पहले पन्ने पर ‘डेरा सच्चा सौदा क्या है? (तथ्य बनाम कल्पना)’ शीर्षक प्रकाशित किया गया था। इसके साथ ‘क्या गुरु जी के खिलाफ साजिश थी?’ उपशीर्षक भी दिया गया था।
हाई कोर्ट ने विज्ञापन की सामग्री पर उठाए सवाल
जस्टिस सुभाष मेहला की पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अदालत के अनुसार, विज्ञापन में की गई टिप्पणियों को देखते हुए प्रथमदृष्टया यह आशंका बनती है कि लंबित अपीलों और मुकदमों के बीच किसी आरोपी या दोषी के पक्ष में अदालतों को साजिश का हिस्सा बताने वाला नैरेटिव न्यायिक प्रक्रिया पर सार्वजनिक दबाव बनाने की कोशिश हो सकता है।
अदालत ने माना कि इस तरह की सामग्री जनता की राय और न्यायिक प्रक्रिया के बीच प्रभाव पैदा कर सकती है तथा इससे न्याय प्रशासन प्रभावित होने की आशंका है।
आपराधिक अवमानना का स्वत: संज्ञान
हाई कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 215 और न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 के संबंधित प्रावधानों के तहत मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रकाशित सामग्री में लगाए गए आरोपों और टिप्पणियों की जांच अवमानना कानून के प्रावधानों के तहत की जानी आवश्यक है।
डेरा प्रबंधन समेत पांच पक्षों को नोटिस
हाई कोर्ट की रजिस्ट्री को 7 अक्टूबर 2026 के लिए पांच संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया है। इनमें डेरा सच्चा सौदा प्रबंधन के साथ एक अंग्रेजी समाचार पत्र के प्रकाशक एवं एडिटर-इन-चीफ और एक हिंदी दैनिक के प्रकाशक एवं एडिटर-इन-चीफ शामिल हैं।
अदालत ने चंडीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को संबंधित पक्षों की जानकारी हाई कोर्ट की रजिस्ट्री को उपलब्ध कराने में सहयोग करने का भी निर्देश दिया है।
मामले को अब आगे नियमित रोस्टर के अनुसार सूचीबद्ध किया जाएगा।
