पंजाब के सरकारी स्कूलों में मेगा PTM के दौरान बच्चों की पढ़ाई पर चर्चा।
पंजाब में सरकारी स्कूलों की पढ़ाई और बच्चों की प्रगति को लेकर 9 अक्टूबर को राज्यव्यापी मेगा अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM) आयोजित की जानी है। इस पहल के तहत राज्य के 23 जिलों के लगभग 19,200 सरकारी स्कूलों में करीब 25 लाख अभिभावकों के शामिल होने की उम्मीद जताई गई है।
‘हर दिन, एक कदम आगे’ थीम के साथ आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य अभिभावकों और शिक्षकों के बीच संवाद बढ़ाना तथा प्रत्येक बच्चे की शैक्षणिक प्रगति पर व्यक्तिगत ध्यान देना है।
बच्चों के रिपोर्ट कार्ड पर होगी चर्चा
इस मेगा PTM के दौरान शिक्षक अभिभावकों के साथ बच्चों के रिपोर्ट कार्ड साझा करेंगे। बातचीत में विद्यार्थियों की कक्षा में परफॉर्मेंस, उपस्थिति, उनकी खूबियों और उन विषयों पर चर्चा की जाएगी, जिनमें उन्हें अतिरिक्त मदद की जरूरत है।
अभिभावकों को यह समझने का मौका मिलेगा कि उनका बच्चा किन क्षेत्रों में अच्छा कर रहा है और कहां सुधार की गुंजाइश है। इसके आधार पर शिक्षक और माता-पिता मिलकर आगे की पढ़ाई के लिए योजना बना सकेंगे।
हर बच्चे के लिए तैयार होगी अलग सीखने की योजना
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के अनुसार, इस पहल में हर विद्यार्थी की जरूरत को ध्यान में रखते हुए व्यक्तिगत सीखने की योजनाओं पर जोर दिया जाएगा।
इसका मकसद केवल रिपोर्ट कार्ड देना नहीं, बल्कि बच्चों की कमजोरियों को समझकर उन्हें सही मार्गदर्शन उपलब्ध कराना भी है। अभिभावकों को घर पर बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करने के तरीके भी बताए जाएंगे।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस पहल को स्कूलों और परिवारों के बीच बेहतर तालमेल बनाने का अवसर बताया। उनका कहना है कि जब शिक्षक और अभिभावक मिलकर बच्चों की प्रगति के लिए काम करते हैं, तो विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ता है।
सरकार की योजना के तहत स्कूलों में विद्यार्थियों के सहयोग से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी साझा की जाएगी। स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों (SMC) के सदस्यों के योगदान को भी सराहा जाएगा।
23 जिलों में एक साथ शिक्षा पर फोकस
राज्यव्यापी कार्यक्रम में विभिन्न जिलों के कैबिनेट मंत्रियों के शामिल होने और अभिभावकों से फीडबैक लेने की भी जानकारी दी गई है।
मेगा PTM को पंजाब की शिक्षा व्यवस्था में स्कूल और परिवार के बीच सहयोग मजबूत करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। इसका प्रमुख लक्ष्य अभिभावकों को बच्चों की वास्तविक शैक्षणिक स्थिति समझने और उनके भविष्य की पढ़ाई में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर देना है।
