डिजिटल वोटर लिस्ट और SIR विवाद को लेकर कांग्रेस का CEC ज्ञानेश कुमार पर हमला
चुनाव आयोग की ओर से राजनीतिक दलों को मशीन से पढ़ी जा सकने वाली मतदाता सूची उपलब्ध कराने के फैसले के बाद SIR को लेकर चल रही राजनीतिक लड़ाई और तेज हो गई है।
कांग्रेस ने इस फैसले को अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग से जोड़ते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि पार्टी और राहुल गांधी लंबे समय से डिजिटल फॉर्मेट में मतदाता सूची उपलब्ध कराने की मांग कर रहे थे।
दो साल पुरानी मांग का कांग्रेस ने किया जिक्र
कांग्रेस के मुताबिक राहुल गांधी और पार्टी ने पिछले दो वर्षों से चुनाव आयोग से ऐसी मतदाता सूची उपलब्ध कराने की मांग की थी जिसे मशीन के जरिए आसानी से पढ़ा और सर्च किया जा सके।
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने इस मांग को बार-बार खारिज किया। अब आयोग की ओर से राजनीतिक दलों को डिजिटल फॉर्मेट में मतदाता सूची उपलब्ध कराने की घोषणा के बाद कांग्रेस ने इसे अपने दबाव का परिणाम बताया है।
2018 के मध्य प्रदेश चुनाव का भी उठाया मुद्दा
कांग्रेस ने अपने बयान में 2018 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव का भी उल्लेख किया। पार्टी का दावा है कि उस समय फर्जी मतदाताओं से जुड़े मामलों को सामने लाने के बाद डिजिटल मतदाता सूची को लेकर उसका रुख और ज्यादा स्पष्ट हुआ।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि डिजिटल फॉर्मेट में वोटर लिस्ट उपलब्ध कराने की मांग को लंबे समय तक स्वीकार नहीं किया गया।
‘ज्ञानेश कुमार को हटाना होगा’
जयराम रमेश ने अपने बयान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग दोहराई। कांग्रेस का कहना है कि केवल CEC में बदलाव पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और IT सिस्टम में भी बदलाव किया जाना चाहिए।
पार्टी ने SIR प्रक्रिया को रोकने की मांग भी उठाई है।
13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं का मुद्दा
कांग्रेस ने SIR को लेकर दावा किया है कि इससे 13 करोड़ से अधिक भारतीयों के वोट के संवैधानिक अधिकार पर असर पड़ सकता है। पार्टी ने इस प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की है।
हालांकि, यह संख्या और इससे जुड़े राजनीतिक दावे कांग्रेस के बयान का हिस्सा हैं। इस मुद्दे पर चुनाव आयोग का पक्ष अलग हो सकता है।
SIR पर विपक्ष का विरोध जारी
SIR को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची से संबंधित फैसलों और प्रक्रिया को लेकर अपनी व्यवस्था सामने रखी जा रही है।
ऐसे में डिजिटल वोटर लिस्ट को लेकर आया नया फैसला SIR विवाद के बीच एक और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच यह टकराव और बढ़ सकता है।
