मुस्कान रस्तोगी की बेटी के Adoption को लेकर चर्चा और फैजान अंसारी का दावा
मेरठ के नीले ड्रम हत्याकांड के नाम से चर्चित सौरभ राजपूत हत्या मामले में अदालत के फैसले के बाद अब आरोपी मुस्कान रस्तोगी की छोटी बेटी के भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
मुस्कान और साहिल शुक्ला को मामले में अदालत से फांसी की सजा सुनाई गई है। मुस्कान की एक बड़ी बेटी भी है, जबकि छोटी बच्ची का जन्म जेल में हुआ था।
इसी बीच फैजान अंसारी नाम के एक व्यक्ति ने बच्ची की देखभाल, शिक्षा और पालन-पोषण का खर्च उठाने की इच्छा जाहिर की है। इसके बाद सोशल मीडिया और लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या कोई व्यक्ति इस तरह किसी बच्चे को सीधे गोद ले सकता है?
सिर्फ इच्छा जताने से नहीं मिलता बच्चा
भारत में Adoption केवल आपसी सहमति या किसी परिवार के फैसले से पूरा नहीं होता। इसके लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है।
सबसे पहले यह देखना जरूरी होता है कि बच्चा कानूनी रूप से Adoption के लिए उपलब्ध है या नहीं।
अगर बच्चे के जैविक माता-पिता जीवित हैं, तो उनकी स्थिति और बच्चे की कानूनी स्थिति को ध्यान में रखे बिना किसी तीसरे व्यक्ति को बच्चा सीधे गोद नहीं दिया जा सकता।
कौन हैं फैजान अंसारी?
फैजान अंसारी को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और ब्रांड प्रमोटर के तौर पर बताया गया है। वह चर्चित मामलों और बॉलीवुड से जुड़े विषयों पर सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रियाएं देते रहे हैं।
मुस्कान की बेटी के मामले में उन्होंने बच्ची की परवरिश और शिक्षा की जिम्मेदारी उठाने की इच्छा जाहिर की है।
हालांकि, किसी बच्चे की कानूनी Adoption के लिए उनकी इच्छा के अलावा भी कई कानूनी शर्तें पूरी करनी होंगी।
CARA से जुड़ी है Adoption की प्रक्रिया
भारत में कई मामलों में कानूनी Adoption की प्रक्रिया CARA के माध्यम से आगे बढ़ती है।
दत्तक ग्रहण के इच्छुक व्यक्ति को निर्धारित ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होता है। इसके बाद दस्तावेजों, पात्रता और परिवार के माहौल से जुड़े पहलुओं की जांच की जाती है।
बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए आगे की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
CWC कब आती है भूमिका में?
यदि बच्चा अनाथ, परित्यक्त या ऐसी स्थिति में है जहां उसके संरक्षण को लेकर कानूनी हस्तक्षेप जरूरी है, तो बाल कल्याण समिति (CWC) की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
CWC बच्चे की परिस्थितियों की जांच कर उसके संरक्षण और पुनर्वास को लेकर आवश्यक निर्णय ले सकती है।
यदि बच्चा कानूनी रूप से Adoption के लिए स्वतंत्र घोषित होता है, तभी निर्धारित व्यवस्था के तहत Adoption की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
अगर मां जेल में हो तो?
माता का जेल में होना अपने आप बच्चे को Adoption के लिए उपलब्ध नहीं बना देता।
ऐसे मामलों में बच्चे की सुरक्षा, परिवार में उपलब्ध देखभाल, माता-पिता की स्थिति और बच्चे के हित जैसे पहलुओं पर विचार किया जाता है।
जरूरत पड़ने पर बाल संरक्षण तंत्र बच्चे की देखभाल की व्यवस्था कर सकता है।
मुस्कान की बेटी का भविष्य किसके हाथ में?
फैजान अंसारी की ओर से बच्ची की जिम्मेदारी लेने की इच्छा सामने आई है, लेकिन बच्ची का भविष्य केवल किसी एक व्यक्ति की इच्छा से तय नहीं होगा।
संबंधित बाल संरक्षण और कानूनी प्रक्रिया के तहत यह तय किया जाएगा कि बच्ची के लिए सुरक्षित और उचित व्यवस्था क्या है।
यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कौन बच्ची को अपनाना चाहता है, बल्कि यह भी है कि कानून और बच्चे के सर्वोत्तम हित के हिसाब से उसके लिए सबसे सुरक्षित विकल्प क्या है।
