Peace Bond क्या है नेहा बोरा मामले में दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला
नेहा बोरा का नाम इन दिनों Peace Bond को लेकर चर्चा में है। दिल्ली हाई कोर्ट ने आइसा नेता की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट के नोटिस को चुनौती दी थी।
इस नोटिस में नेहा बोरा को शांति बनाए रखने के लिए ₹10,000 का बॉन्ड भरने और एक जमानती देने को कहा गया था।
लेकिन आखिर Peace Bond होता क्या है? क्या यह किसी अपराध की सजा है? क्या इसे साइन करने के बाद प्रदर्शन करने पर रोक लग जाती है? और सबसे बड़ा सवाल—अगर कोई Peace Bond पर साइन करने से इनकार कर दे तो क्या होता है?
आइए आसान भाषा में समझते हैं।
1. Peace Bond क्या होता है?
Peace Bond को आसान भाषा में शांति बनाए रखने का लिखित वादा समझ सकते हैं।
यह किसी अपराध के लिए दी जाने वाली सजा नहीं है। इसका मकसद संभावित रूप से सार्वजनिक शांति भंग होने की स्थिति को रोकना है।
BNSS यानी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 में इस तरह की निवारक कार्रवाई का प्रावधान है। धारा 126 के तहत निर्धारित परिस्थितियों में कार्यपालिका मजिस्ट्रेट किसी व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने को कह सकता है।
2. नेहा बोरा को क्यों भरना है ₹10 हजार?
नेहा बोरा को चुनाव आयोग के खिलाफ एक विरोध मार्च के संदर्भ में SEM कोर्ट की ओर से नोटिस दिया गया था।
नोटिस में उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने और ₹10,000 का Peace Bond भरने के साथ एक जमानती उपलब्ध कराने को कहा गया था।
नेहा बोरा ने इस नोटिस को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी है।
कोर्ट ने हालांकि मजिस्ट्रेट को कुछ निर्देश दिए हैं, जिनमें संबंधित सामग्री उपलब्ध कराने की बात भी शामिल है।
3. क्या Peace Bond भरना मतलब दोषी होना है?
नहीं।
Peace Bond को अपने आप में किसी अपराध में दोष सिद्ध होने की घोषणा नहीं माना जाता। यह मुख्य रूप से एक preventive यानी निवारक प्रक्रिया है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित व्यक्ति तय अवधि के दौरान ऐसी गतिविधि न करे जिससे सार्वजनिक शांति या व्यवस्था प्रभावित हो।
4. Peace Bond की अवधि कितनी होती है?
BNSS की धारा 126 के तहत इस तरह की शांति बनाए रखने वाली कार्रवाई की अधिकतम अवधि एक साल तक हो सकती है।
हालांकि किसी व्यक्ति पर वास्तव में कौन-सी शर्तें लागू होंगी, यह संबंधित नोटिस और मजिस्ट्रेट के आदेश पर निर्भर करता है।
5. अगर Peace Bond साइन नहीं किया तो?
यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि Peace Bond केवल एक औपचारिक कागज नहीं है।
कानून में निर्धारित परिस्थितियों में यदि कोई व्यक्ति बॉन्ड भरने से इनकार करता है या आवश्यक जमानती पेश नहीं कर पाता, तो उसके खिलाफ हिरासत की कार्रवाई हो सकती है।
ऐसी स्थिति में मजिस्ट्रेट कानून के अनुसार व्यक्ति को तब तक हिरासत में रखने का आदेश दे सकता है, जब तक बॉन्ड की आवश्यकता पूरी नहीं होती या कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई नहीं होती।
6. Peace Bond तोड़ दिया तो?
अगर कोई व्यक्ति बॉन्ड में निर्धारित शर्तों का उल्लंघन करता है और सक्षम मजिस्ट्रेट इस बात से संतुष्ट होता है, तो BNSS के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
परिस्थितियों के आधार पर गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़ा आदेश भी दिया जा सकता है।
इसके अलावा यदि पुलिस को किसी संज्ञेय अपराध की आशंका हो, तो कानून में उपलब्ध अलग-अलग निवारक प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।
7. SEM Court क्या है?
SEM का मतलब Special Executive Magistrate है।
यह Judicial Magistrate से अलग व्यवस्था है। SEM प्रशासनिक/कार्यकारी व्यवस्था के तहत कुछ कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल करता है।
दिल्ली में कुछ पुलिस अधिकारियों को भी SEM की शक्तियां दी जाती हैं। इसी कारण प्रदर्शन, धरना या कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में SEM की भूमिका सामने आती है।
8. नेहा बोरा को कब हिरासत में लिया गया था?
मामले से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था, जब वह ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में शामिल होने जा रही थीं। उन्हें अगले दिन यानी 17 अक्टूबर को रिहा कर दिया गया था।
अब Peace Bond से जुड़ी उनकी याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में खारिज होने के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में है।
9. Peace Bond को लेकर पहले भी सवाल उठे हैं
दिल्ली हाई कोर्ट ने 2018 के एक फैसले में ऐसे प्रावधानों के इस्तेमाल को लेकर चिंता व्यक्त की थी। अदालत ने इस बात पर सवाल उठाया था कि क्या इन शक्तियों का असर समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर असमान रूप से पड़ सकता है।
खास तौर पर जमानत राशि या जमानती की व्यवस्था न कर पाने वाले लोगों के लंबे समय तक हिरासत में रहने को लेकर भी अदालत ने चिंता जताई थी।
