Jamia Controversy Timeline 1992 to 2026
जामिया मिल्लिया इस्लामिया एक बार फिर छात्रसंघ चुनाव के मुद्दे को लेकर चर्चा में है। विश्वविद्यालय में आखिरी छात्रसंघ चुनाव वर्ष 2006 में हुए थे। इसके बाद छात्रसंघ भंग कर दिया गया और अब करीब 20 वर्ष से छात्र चुनाव बहाली की मांग कर रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि कैंपस की समस्याओं को प्रशासन के सामने मजबूती से रखने के लिए निर्वाचित छात्रसंघ जरूरी है। दूसरी ओर, चुनाव बहाली को लेकर पिछले वर्षों में अदालत, आंदोलन और प्रशासनिक प्रक्रिया का मुद्दा सामने आता रहा है।
जामिया विवादों की पूरी टाइमलाइन
1992: सलमान रुश्दी की किताब को लेकर विवाद
वर्ष 1992 में तत्कालीन प्रोफेसर मुशीरुल हसन द्वारा सलमान रुश्दी की किताब पर लगे प्रतिबंध का विरोध किए जाने के बाद जामिया में विरोध प्रदर्शन हुआ था।
प्रदर्शन के दौरान कुछ संगठनों और छात्रों ने प्रोफेसर के इस्तीफे की मांग की थी।
2006: छात्रसंघ हुआ भंग
मार्च 2006 में प्रशासन और छात्रों के बीच बढ़ते गतिरोध तथा हिंसक घटनाओं के बाद जामिया के छात्रसंघ को पूरी तरह भंग कर दिया गया था।
इसके बाद से कैंपस में निर्वाचित छात्रसंघ की व्यवस्था नहीं रही।
2011: अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा
फरवरी 2011 में जामिया को अल्पसंख्यक संस्थान घोषित किए जाने के बाद इस फैसले को लेकर विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
2012: चुनाव बहाली की मांग कोर्ट तक पहुंची
छात्रसंघ चुनाव दोबारा कराने की मांग को लेकर वर्ष 2012 में छात्र हमीदुर्रहमान ने हाई कोर्ट का रुख किया।
छात्रों के मुताबिक, विश्वविद्यालय ने उस समय चुनाव कराने के लिए परिस्थितियों को अनुकूल नहीं बताया था।
2017: प्रदर्शन और हड़ताल
2017 में एक बार फिर छात्रसंघ चुनाव की बहाली की मांग ने जोर पकड़ा। छात्रों ने प्रदर्शन और हड़ताल की।
छात्रों के अनुसार, उस समय भी कोर्ट में मामला लंबित होने का हवाला दिया गया।
2019: CAA विरोध से राष्ट्रीय सुर्खियों में आया कैंपस
दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन के दौरान जामिया परिसर में भी विरोध हुआ।
पुलिस और छात्रों के बीच झड़प तथा आंसू गैस के इस्तेमाल की घटनाओं ने जामिया को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया।
2022: चुनाव बहाली को लेकर फिर सवाल
छात्रों का दावा है कि 2022 में संबंधित कानूनी मामला सुलझने के बावजूद छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई।
इसके बाद भी छात्र चुनाव कराने की मांग करते रहे।
दिसंबर 2025: परीक्षा के सवाल पर विवाद
दिसंबर 2025 में सोशल वर्क विभाग की परीक्षा में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार से जुड़े प्रश्न को लेकर विवाद हुआ।
इसके बाद प्रशासन ने प्रोफेसर वीरेंद्र बालाजी सहारे के निलंबन की कार्रवाई की थी।
अप्रैल 2026: ‘युवा कुंभ’ को लेकर विरोध
अप्रैल 2026 में परिसर में आरएसएस द्वारा आयोजित ‘युवा कुंभ’ कार्यक्रम का विभिन्न छात्र संगठनों ने विरोध किया।
इस दौरान छात्रों और सुरक्षा गार्डों के बीच हिंसक झड़प की खबर सामने आई।
छात्रों की सबसे बड़ी मांग क्या है?
छात्र संगठनों का प्रमुख मुद्दा छात्रसंघ चुनाव की बहाली है। उनका तर्क है कि मौजूदा ‘विषय प्रतिनिधियों’ की व्यवस्था छात्रों की सामूहिक समस्याओं को उठाने के लिए पर्याप्त नहीं है।
छात्रों के अनुसार, हॉस्टल में खाने की गुणवत्ता, फीस से जुड़े मुद्दे और अन्य समस्याओं के लिए छात्रों के पास एक मजबूत निर्वाचित प्रतिनिधित्व होना चाहिए।
20 साल से क्यों जारी है इंतजार?
2006 में छात्रसंघ भंग होने के बाद चुनाव बहाली की मांग कई चरणों में सामने आई। 2012 में मामला कोर्ट तक गया, 2017 में आंदोलन हुआ और 2022 के बाद भी छात्र चुनाव बहाली की मांग करते रहे।
यही वजह है कि जामिया में छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा केवल वर्तमान विवाद नहीं बल्कि करीब दो दशक पुराना विषय बन चुका है।
अब आगे क्या?
जामिया में छात्रसंघ चुनाव को लेकर छात्रों की मांग लगातार बनी हुई है। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और क्या भविष्य में कैंपस में फिर से निर्वाचित छात्रसंघ की व्यवस्था शुरू होती है।
इस बीच जामिया से जुड़े पुराने और नए विवादों ने छात्र प्रतिनिधित्व, प्रशासनिक व्यवस्था और कैंपस राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
