रेस कोर्स मस्जिद और वक्फ बोर्ड मामला
दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद में हाईकोर्ट ने फिलहाल लोगों को नमाज अदा करने के लिए मस्जिद तक जाने की अनुमति देने का आदेश जारी नहीं किया है। अदालत में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला दिया। साथ ही सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि दिल्ली वक्फ बोर्ड के आवेदन पर फैसला होने तक मस्जिद को नहीं तोड़ा जाएगा।
जस्टिस अनिश दयाल की पीठ ने सैयद अहमद सऊद की याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने अदालत से मस्जिद तक जाने का रास्ता खोलने, नमाज अदा करने की अनुमति देने और धार्मिक स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की थी।
तोड़फोड़ के बीच लोगों की सुरक्षा का मुद्दा उठा
केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील आशीष दीक्षित ने अदालत को बताया कि मस्जिद के आसपास के इलाके में तोड़फोड़ की कार्रवाई चल रही है। ऐसे हालात में लोगों को वहां जाने की अनुमति देने से उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
अदालत ने इस दलील पर विचार करते हुए पूछा कि यदि तोड़फोड़ के दौरान कोई व्यक्ति घायल हो जाता है, तो मुआवजे की जिम्मेदारी किसकी होगी। कोर्ट ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए सरकार की दलील को सही माना और प्रवेश की अनुमति देने का निर्देश देने से इनकार कर दिया।
याचिका में मस्जिद की उम्र और विरासत का उल्लेख
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में दावा किया है कि रेस कोर्स मस्जिद 150 वर्ष से अधिक पुरानी है। उनके अनुसार, वर्ष 1977 में इसे वक्फ संपत्ति के तौर पर दर्ज किया गया था। याचिका में दिल्ली सरकार की वर्ष 2009 की अधिसूचना का हवाला देते हुए इसे ग्रेड-2 विरासत स्थल बताए जाने की बात भी कही गई है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि आसपास की झुग्गियों को हटाने के दौरान 7 अक्टूबर को मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति काट दी गई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि मस्जिद उन स्थानों में शामिल नहीं थी, जिन्हें अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के तहत खाली कराया जाना था।
मस्जिद नहीं तोड़ने का आश्वासन अदालत के रिकॉर्ड में
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि दिल्ली वक्फ बोर्ड के आवेदन पर निर्णय होने तक मस्जिद को नहीं तोड़ा जाएगा। हाईकोर्ट ने सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड पर दर्ज किया और मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
यह आश्वासन मस्जिद को लेकर चल रही कानूनी कार्यवाही का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि, इससे मस्जिद में प्रवेश या नमाज अदा करने की अनुमति स्वतः नहीं मिलती। इस संबंध में अदालत ने सुरक्षा की स्थिति को ध्यान में रखा।
इलाके के मंदिर का भी दिया गया उदाहरण
केंद्र सरकार ने अदालत में यह भी बताया कि संबंधित क्षेत्र में स्थित एक मंदिर में भी लोगों को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। सरकार के अनुसार, यह प्रतिबंध इलाके में चल रहे तोड़फोड़ के काम और सुरक्षा से जुड़ी परिस्थितियों के कारण है।
फिलहाल अदालत ने सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। आगे की सुनवाई में संबंधित पक्षों की दलीलों और सरकारी रिपोर्ट के आधार पर मामले की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
