दिल्ली पुलिस के जवानों ने दोनों अधिकारियों के तबादले के विरोध में मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।
दिल्ली पुलिस विभाग में अधिकारियों के तबादले को लेकर असंतोष खुलकर सामने आया है। सोमवार, 2 नवंबर को दिल्ली पुलिस के करीब 80 से 100 जवान पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर एक के बाहर इकट्ठा हुए। प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों की मांग है कि ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के SHO अरुण कुमार को उनकी पुरानी तैनाती पर वापस भेजा जाए।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस आयुक्त के साथ सीधे बातचीत करने की मांग भी उठाई। स्थिति को संभालने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और जवानों से बातचीत की।
शाहदरा थाने में विवाद के बाद शुरू हुआ मामला
इस पूरे विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस स्टेशन में हुई घटना से हुई थी। यहां वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच विवाद हो गया था। इस दौरान अधिवक्ता ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट आई थी।
घटना के बाद वकीलों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि मामले में संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा ACP मनस्वी वशिष्ठ पर वकीलों से बातचीत के दौरान रिवॉल्वर दिखाकर धमकाने का आरोप भी लगाया गया था।
इस मामले को लेकर वकीलों ने दिल्ली की जिला अदालतों में कामकाज का बहिष्कार शुरू कर दिया था।
वकीलों की मांग के बाद दोनों अधिकारियों का तबादला
विवाद बढ़ने के बाद 28 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के तत्कालीन SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार का तबादला कर दिया।
ACP मनस्वी वशिष्ठ को गांधी नगर उपमंडल से विशेष पुलिस इकाई (महिला एवं बच्चों के लिए) में भेजा गया, जबकि इंस्पेक्टर अरुण कुमार को सुरक्षा इकाई में तैनात किया गया।
इन तबादलों के बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल समाप्त कर दी। हालांकि, पुलिस विभाग के कुछ जवान इस फैसले से नाराज बताए जा रहे हैं। इसी के विरोध में वे दोनों अधिकारियों के समर्थन में पुलिस मुख्यालय के बाहर पहुंचे।
मुख्यालय के बाहर जुटे 80 से 100 पुलिसकर्मी
2 नवंबर की सुबह पुलिस मुख्यालय के बाहर जवानों की भीड़ जमा हो गई। अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन में करीब 80 से 100 पुलिसकर्मी शामिल थे।
मौके पर पहुंचे वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। नई दिल्ली जिले के DCP सचिन शर्मा ने भी ACP मनस्वी वशिष्ठ से बात की और जवानों को अनुशासन बनाए रखने की सलाह दी।
अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को मुख्यालय के अंदर आकर बातचीत करने का सुझाव दिया, लेकिन जवान पुलिस आयुक्त के साथ सामूहिक चर्चा की मांग पर कायम रहे।
ACP मनस्वी वशिष्ठ ने खुली बातचीत की अपील की
ACP मनस्वी वशिष्ठ ने एक वीडियो संदेश जारी कर उनका समर्थन करने वाले पुलिसकर्मियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि साथियों का समर्थन उनके लिए मजबूती का कारण है।
हालांकि, उन्होंने जवानों से अपील की कि अनुशासित बल का हिस्सा होने के नाते उन्हें प्रदर्शन के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।
उन्होंने पुलिस मुख्यालय में संपर्क सभा आयोजित करने की मांग रखी। उनका सुझाव था कि इसमें अधिक से अधिक पुलिसकर्मी शामिल हों और जो जवान किसी कारण से नहीं पहुंच सकें, वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ें। बैठक में घटना से जुड़े सभी पहलुओं और पुलिसकर्मियों के सवालों पर चर्चा की जाए।
पुलिस और वकीलों के बीच समन्वय की कोशिश
इस विवाद के बीच 30 अक्टूबर को पुलिस और वकील संगठनों के बीच एक बैठक भी हुई थी। इसमें भविष्य में ऐसे विवादों को रोकने के लिए संयुक्त समन्वय समिति बनाने और शिकायतों के समाधान के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने पर सहमति बनी थी।
फिलहाल प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मी चाहते हैं कि उनकी मांग सीधे पुलिस आयुक्त तक पहुंचे। अब इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों की अगली पहल पर सबकी नजर है।
