राजेश खुल्लर के साथ बैठक बेनतीजा रहने के बाद गेस्ट टीचर्स ने आंदोलन की अगली रणनीति बनाने का फैसला किया।
हरियाणा के 10,757 गेस्ट टीचर्स को नियमित करने की मांग को एक बार फिर झटका लगा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी राजेश खुल्लर और गेस्ट टीचर एसोसिएशन के पदाधिकारियों के बीच सोमवार को हुई बैठक में कोई समाधान नहीं निकल पाया। करीब 30 मिनट तक चली इस मुलाकात के बाद भी शिक्षकों को नियमित करने के मुद्दे पर सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला।
चंडीगढ़ में राजेश खुल्लर के आवास पर हुई बैठक के बारे में गेस्ट टीचर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के मीडिया प्रवक्ता अजय लोहान ने बताया कि एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज अधिकारियों के सामने रखे। उन्होंने आरोप लगाया कि बैठक के दौरान अधिकारियों का रवैया टालमटोल वाला रहा।
अजय लोहान के मुताबिक, राजेश खुल्लर ने स्पष्ट कहा कि सरकार पहले ही स्पीकिंग ऑर्डर जारी कर चुकी है और अब इसे वापस नहीं लिया जा सकता। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की ओर से अन्य जो भी संभव सहयोग होगा, वह किया जाएगा।
हाईकोर्ट के फैसले के बावजूद नियमितीकरण नहीं होने का आरोप
गेस्ट टीचर संयुक्त संघर्ष मोर्चा का कहना है कि हाईकोर्ट शिक्षकों को नियमित करने के संबंध में फैसला दे चुका है, लेकिन सरकार इसके बावजूद उन्हें पक्का नहीं कर रही है।
अजय लोहान ने आरोप लगाया कि स्कूल शिक्षा विभाग ने 24 अक्टूबर 2026 को स्पीकिंग ऑर्डर जारी कर 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत गेस्ट टीचर्स को नियमित करने से इनकार कर दिया था। उनका कहना है कि सरकार को इस आदेश के जरिए मांग खारिज करने के बजाय अदालत के फैसले का पालन सुनिश्चित करना चाहिए था।
बैठक के दौरान अधिकारियों की ओर से कथित तौर पर यह भी कहा गया कि गेस्ट टीचर्स स्पीकिंग ऑर्डर को न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं। इस पर मोर्चा प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि जब नियमितीकरण का मामला सरकार के सामने विचाराधीन है, तो विभाग को पहले अदालत के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
सिरसा से शुरू की थी न्याय यात्रा
गेस्ट टीचर्स अपनी मांग को लेकर पहले भी आंदोलन कर चुके हैं। 21 अक्टूबर को शिक्षकों ने सिरसा से न्याय यात्रा शुरू की थी। उनका कार्यक्रम चंडीगढ़ पहुंचकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने का था।
इस दौरान कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से उनकी बातचीत करवाने का आश्वासन दिया था। इसी पहल के बाद सोमवार को एसोसिएशन के प्रतिनिधियों और मुख्यमंत्री के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी राजेश खुल्लर के बीच बैठक आयोजित हुई।
हालांकि, इस बैठक से भी नियमितीकरण के मुद्दे पर कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया।
अब प्रदेशभर के जिला और ब्लॉक प्रधानों की बैठक होगी
अजय लोहान ने बताया कि बैठक समाप्त होने के बाद संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधियों ने आपस में चर्चा की। इसमें फैसला लिया गया कि जल्द ही प्रदेश के सभी जिलों और ब्लॉकों के प्रधानों की बैठक बुलाई जाएगी।
इस बैठक में आगे के आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। मोर्चा प्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक नियमितीकरण की मांग पर ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक वे अपनी मांग उठाते रहेंगे।
शिक्षकों ने दूसरे कर्मचारियों के नियमितीकरण का दिया उदाहरण
गेस्ट टीचर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के मीडिया प्रवक्ता अजय लोहान ने कहा कि सरकार ने 2014 की नीति के तहत हारट्रोन के माध्यम से नियुक्त 58 कर्मचारियों को नियमित किया है। इसके अलावा कॉलेजों में कार्यरत लेक्चरर और स्कूलों में विज्ञापन के जरिए नियुक्त शिक्षकों को भी नियमित किया गया है।
शिक्षकों का सवाल है कि जब अन्य श्रेणियों के कर्मचारियों को नियमित किया जा सकता है, तो लंबे समय से स्कूलों में सेवाएं दे रहे गेस्ट टीचर्स को यह लाभ क्यों नहीं दिया जा रहा।
अजय लोहान ने कहा कि गेस्ट टीचर्स भी कई वर्षों से शिक्षा व्यवस्था में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में उनकी मांग है कि सरकार तीन साल की नीति के तहत उन्हें नियमित करे।
24 अक्टूबर के स्पीकिंग ऑर्डर में क्या कहा गया?
हरियाणा के स्कूल शिक्षा विभाग ने सुखविंदर सिंह व अन्य गेस्ट टीचर्स की नियमितीकरण संबंधी मांग पर 24 अक्टूबर 2026 को स्पीकिंग ऑर्डर जारी किया था। यह पत्र सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को भेजा गया था। विभाग ने 2014 की नीति के तहत शिक्षकों को नियमित करने से इनकार किया।
स्पीकिंग ऑर्डर में विभाग की ओर से प्रमुख रूप से निम्नलिखित आधार बताए गए:
- नियुक्ति अस्थायी व्यवस्था के तहत हुई: विभाग के अनुसार, वर्ष 2005 से स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए गेस्ट टीचर्स को पीरियड के आधार पर रखा गया था। इसे नियमित भर्ती नहीं माना गया।
- नियमित भर्ती की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई: विभाग का कहना है कि नियुक्ति के समय नियमित भर्ती की तरह परीक्षा और मेरिट के आधार पर चयन नहीं किया गया था। साथ ही आरक्षण संबंधी नियमों का भी पालन नहीं हुआ था।
- लंबी सेवा से नियमितीकरण का अधिकार नहीं: विभाग ने कहा कि लगभग 20 साल तक नौकरी करने मात्र से नियमित होने का अधिकार नहीं मिल जाता। इसके लिए 2014 की नीति में निर्धारित सभी शर्तें पूरी करनी जरूरी हैं।
- 2019 के कानून का हवाला: विभाग ने हरियाणा गेस्ट टीचर्स सर्विस एक्ट-2019 और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून में गेस्ट टीचर्स की नौकरी जारी रखने की सुरक्षा है, लेकिन नियमित करने का प्रावधान नहीं है।
इन्हीं आधारों पर विभाग ने नियमितीकरण की मांग को खारिज कर दिया।
आंदोलन की अगली रणनीति पर टिकी नजर
सरकार और गेस्ट टीचर एसोसिएशन के बीच हुई बातचीत बेनतीजा रहने के बाद अब शिक्षकों की अगली रणनीति पर नजर है। संयुक्त संघर्ष मोर्चा जल्द ही जिला और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर आंदोलन की रूपरेखा तय करेगा।
फिलहाल गेस्ट टीचर्स नियमितीकरण की मांग पर अड़े हुए हैं, जबकि शिक्षा विभाग अपने स्पीकिंग ऑर्डर में दिए गए आधारों पर कायम है।
