पंजाब सरकार लाल लकीर क्षेत्रों में रहने वाले पात्र परिवारों को उनके घरों का आधिकारिक स्वामित्व दस्तावेज दे रही है।
पंजाब के गांवों में लाल लकीर के अंदर बने मकानों और भूखंडों का सरकारी रिकॉर्ड तैयार करने के लिए राज्य सरकार की ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना आगे बढ़ रही है। इस योजना के तहत अब तक राज्य के सभी 23 जिलों के 1,377 गांवों में 2.19 लाख से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड बांटे जा चुके हैं। यह आंकड़ा 2 नवंबर 2026 तक का है।
राजस्व, पुनर्वास एवं आपदा प्रबंधन मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य पंजाब के सभी 10,689 गांवों के आबादी देह क्षेत्रों में रहने वाले पात्र परिवारों को उनके मकानों और भूखंडों का कानूनी रूप से मान्य स्वामित्व दस्तावेज देना है।
क्या है ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना?
पंजाब के गांवों में आबादी देह क्षेत्र को आम तौर पर लाल लकीर कहा जाता है। इन इलाकों में कई परिवार पीढ़ियों से अपने घरों में रह रहे हैं, लेकिन उनके मकानों का पूरा रिकॉर्ड सरकारी राजस्व दस्तावेजों में उपलब्ध नहीं था।
इस वजह से कई लोगों को अपने घर का मालिकाना हक साबित करने, संपत्ति की सीमा तय कराने और बैंक से ऋण लेने में मुश्किलें आती थीं। कुछ परिवार 30 से 40 साल से अपने घरों में रह रहे थे, लेकिन उनके पास स्वामित्व साबित करने के लिए प्रामाणिक सरकारी दस्तावेज नहीं थे।
योजना के तहत अब इन संपत्तियों का सर्वे करके रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है और सही मालिकों को प्रॉपर्टी कार्ड दिया जा रहा है।
चार चरणों में 10,689 गांवों को किया जाएगा शामिल
राज्य सरकार ने योजना को चार चरणों में पूरा करने का कार्यक्रम बनाया है।
| चरण | गांवों की संख्या | निर्धारित समय |
|---|---|---|
| पहला | 2,284 | 15 नवंबर 2026 |
| दूसरा | 1,680 | नवंबर 2026 के अंत तक |
| तीसरा | 1,152 | दिसंबर 2026 के मध्य तक |
| चौथा | 5,579 | जनवरी 2027 तक |
पहले चरण का काम 15 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद दूसरे और तीसरे चरण के गांवों में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। अंतिम चरण में शेष 5,579 गांव शामिल होंगे।
ड्रोन सर्वे से कैसे तैयार होगा मालिकाना रिकॉर्ड?
योजना के तहत सबसे पहले गांव के आबादी देह क्षेत्र को सरकारी स्तर पर अधिसूचित किया जाता है। इसके बाद मुनादी के माध्यम से ग्रामीणों को सर्वे की जानकारी दी जाती है।
अगले चरण में ARRO की ओर से गांव स्तरीय समिति गठित की जाती है। सर्वे ऑफ इंडिया ड्रोन की मदद से मकानों और भूखंडों का नक्शा तैयार करता है। इसके बाद पटवारी या सर्वे अधिकारी गांव की समिति के साथ घर-घर जाकर संपत्ति के मालिक की पहचान और संबंधित जानकारी दर्ज करते हैं।
प्रारंभिक नक्शे और मालिकों की सूची गांव में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाती है। ग्राम पंचायत को भी इसकी प्रति दी जाती है। संपत्ति से जुड़ी जानकारी मालिकों को व्हाट्सऐप पर भेजी जाती है, ताकि वे अपने विवरण की जांच कर सकें। यदि कोई गलती हो तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
प्रॉपर्टी कार्ड में मिलेगा QR कोड और संपत्ति का नक्शा
योजना के तहत मिलने वाला प्रॉपर्टी कार्ड लैमिनेटेड होगा और इसे एक लिफाफे में दिया जाएगा। कार्ड पंजाबी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में तैयार किया गया है।
इसमें संपत्ति का सर्वे यूनिट नंबर, GPS लोकेशन, ड्रोन सर्वे से तैयार नक्शा और QR कोड होगा। QR कोड के जरिए कार्ड में दर्ज जानकारी का ऑनलाइन सत्यापन किया जा सकेगा। कार्ड वितरण की जानकारी पटवारी के रजिस्टर में दर्ज होगी और जमाबंदी पोर्टल पर रोजाना अपडेट की जाएगी।
किन परिवारों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
सरकार के अनुसार, योजना का विशेष लाभ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और अनुसूचित जाति के परिवारों को मिल सकता है। ऐसे कई परिवारों के लिए आबादी देह में बना मकान ही उनकी एकमात्र अचल संपत्ति है।
प्रॉपर्टी कार्ड मिलने से उनके पास अपने घर का सरकारी दस्तावेजी प्रमाण होगा। इससे मालिकाना अधिकारों की सुरक्षा में मदद मिलेगी। साथ ही संपत्ति के आधार पर बैंक से ऋण लेने और मकान का पंजीकरण कराने की प्रक्रिया भी आसान हो सकती है।
सरकार का कहना है कि संपत्ति की सीमाओं और मालिकाना हिस्सेदारी का रिकॉर्ड तैयार होने से पड़ोसियों और परिवारों के बीच होने वाले संपत्ति विवादों को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
कार्ड में नाम या क्षेत्रफल गलत हो तो क्या करें?
प्रॉपर्टी कार्ड मिलने के बाद उसमें दर्ज विवरण की जांच करना जरूरी होगा। यदि किसी व्यक्ति को नाम, संपत्ति के क्षेत्रफल या मालिकाना हिस्सेदारी में गलती दिखाई देती है, तो वह संबंधित हलका पटवारी या तहसीलदार से संपर्क कर सकता है।
वर्तमान व्यवस्था में आपत्ति और अपील के लिए आवश्यक दस्तावेज ARRO यानी तहसीलदार या नायब तहसीलदार के कार्यालय में जमा कराए जा सकते हैं। यदि ARRO के फैसले से व्यक्ति संतुष्ट नहीं है, तो वह RRO यानी SDM और उसके बाद CRRO यानी उपायुक्त के समक्ष अपील कर सकता है। सुधार मंजूर होने पर संशोधित प्रॉपर्टी कार्ड जारी किया जाएगा।
दिसंबर से ऑनलाइन सुधार की सुविधा की तैयारी
राजस्व मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने बताया कि प्रॉपर्टी कार्ड में गलतियों को ठीक कराने के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया जाएगा। दिसंबर 2026 से कार्ड पर मौजूद QR कोड स्कैन करके जरूरी दस्तावेज अपलोड करने की सुविधा देने की तैयारी है।
इससे लोगों को छोटी-मोटी गलतियों के सुधार के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है। फिलहाल सरकार ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे कार्ड प्राप्त करने के बाद उसमें दर्ज जानकारी को ध्यान से जांचें।
ग्राम पंचायतों को भी मिलेगा फायदा
योजना से ग्रामीण परिवारों के साथ-साथ ग्राम पंचायतों और प्रशासन को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। मकानों, सड़कों, नालियों और सार्वजनिक स्थानों के सटीक नक्शे उपलब्ध होने से गांवों में विकास कार्यों की योजना बनाना आसान हो सकता है।
सरकार का कहना है कि डिजिटल और भरोसेमंद संपत्ति रिकॉर्ड तैयार होने से प्रशासनिक कामकाज में भी मदद मिलेगी। जिन गांवों में तकनीकी कारणों से ड्रोन सर्वे नहीं हो पाया है, वहां जमीन पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच की जाएगी।
इस तरह ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना का उद्देश्य गांवों में लंबे समय से अधूरे पड़े संपत्ति रिकॉर्ड को व्यवस्थित करना और पात्र परिवारों को उनके घर का आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध कराना है।
