ACP मनस्वी वशिष्ठ और इंस्पेक्टर अरुण कुमार के तबादले के विरोध में करीब 150 पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शन किया था।
दिल्ली पुलिस के भीतर अधिकारियों की तैनाती को लेकर चल रहा विवाद लगातार चर्चा में बना हुआ है। ACP मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित किए जाने के बाद इस मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। इससे पहले करीब 150 पुलिसकर्मी दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर जमा हुए थे। इनमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं। प्रदर्शनकारियों ने ACP मनस्वी वशिष्ठ और इंस्पेक्टर अरुण कुमार को उनकी पुरानी तैनाती पर वापस भेजने की मांग उठाई थी।
मामले की शुरुआत दोनों अधिकारियों के तबादले से हुई थी। इसके बाद शाहदरा पुलिस स्टेशन में वकील और पुलिस के बीच हुए विवाद की पृष्ठभूमि भी इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ गई।
28 अक्टूबर को दोनों अधिकारियों का हुआ था तबादला
दिल्ली पुलिस ने 28 अक्टूबर को ACP मनस्वी वशिष्ठ को गांधी नगर सब-डिविजन के SDPO पद से हटाकर स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर विमेन एंड चिल्ड्रन में तैनात कर दिया था।
इसके साथ ही शाहदरा थाने के तत्कालीन SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार को भी नई जिम्मेदारी देते हुए सिक्योरिटी यूनिट में भेज दिया गया था।
इन दोनों तबादलों को लेकर पुलिस विभाग के कुछ कर्मचारियों में असहमति देखने को मिली। सोमवार को जवानों ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर एकत्र होकर विरोध जताया। करीब 150 पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया और दोनों अधिकारियों की पुरानी तैनाती बहाल करने की मांग की।
शाहदरा पुलिस स्टेशन की घटना के बाद बढ़ा था तनाव
इस विवाद की एक अहम कड़ी शाहदरा पुलिस स्टेशन में हुई कथित झड़प है। इस घटना के दौरान वकील ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट लगने की बात सामने आई थी। घटना के बाद वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच तनाव बढ़ गया।
वकीलों ने मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर जिला अदालतों में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी। इससे पुलिस और वकीलों के बीच विवाद और गहरा गया।
बाद में एफआईआर और शिकायतों की जांच दो महीने के भीतर करने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद वकीलों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया था। हालांकि, इस घटना से जुड़ा विवाद और अधिकारियों के तबादले का मुद्दा चर्चा में बना रहा।
पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर मांगा था ओपन हाउस
ACP मनस्वी वशिष्ठ ने तबादले से पहले दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार को पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने ओपन हाउस आयोजित करने की मांग की थी।
ओपन हाउस में पुलिसकर्मी अपने विभाग से जुड़ी समस्याओं और शिकायतों को वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रख सकते हैं। यह कर्मचारियों और पुलिस प्रशासन के बीच संवाद का एक माध्यम होता है।
मनस्वी वशिष्ठ की ओर से यह मांग ऐसे समय की गई थी, जब विभाग में अधिकारियों की तैनाती और शाहदरा थाने की घटना को लेकर चर्चाएं चल रही थीं।
निलंबन की कार्रवाई से मामले ने लिया नया मोड़
अब ACP मनस्वी वशिष्ठ के निलंबन की खबर सामने आने के बाद पूरा मामला फिर सुर्खियों में है। इससे पहले करीब 150 पुलिसकर्मियों का मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करना भी असामान्य घटनाक्रम माना गया था।
प्रदर्शनकारियों की मांग दोनों अधिकारियों की पुरानी पोस्टिंग बहाल करने की थी। वहीं, अब ACP के निलंबन के बाद यह सवाल उठ रहा है कि विभाग आगे इस मामले को किस तरह संभालेगा।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में निलंबन के विस्तृत आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किए गए हैं। ऐसे में निलंबन की वजह को लेकर किसी दावे को अंतिम तथ्य के रूप में पेश करना जल्दबाजी होगी। आधिकारिक आदेश और विभाग की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
