पंजाब में आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले दो विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की पार्टी ने जैसे ही 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की, उसके अगले ही दिन दो मौजूदा विधायकों ने इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। सनौर के विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना के विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा अब AAP का हिस्सा नहीं हैं। इस घटनाक्रम को आगामी चुनाव से पहले पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।
पंजाब में चुनावी मुकाबले की शुरुआत अभी से दिलचस्प होती दिखाई दे रही है। आम आदमी पार्टी एक तरफ अपने उम्मीदवारों की घोषणा करके चुनावी तैयारी में जुटी है, तो दूसरी तरफ पार्टी के दो विधायकों के इस्तीफे ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी से अलग होने का फैसला लिया है। वहीं पूर्व कैबिनेट मंत्री चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भी सोशल मीडिया पर अपनी प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की।
यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम है क्योंकि दोनों विधायक उन विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां AAP ने आगामी चुनाव के लिए संगठनात्मक स्तर पर नए प्रभारियों की नियुक्ति की थी।
पहली उम्मीदवार सूची के बाद क्यों बढ़ी नाराजगी की चर्चा?
31 अक्टूबर को आम आदमी पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए अपनी पहली सूची जारी की थी। इसमें कुल 40 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए।
इस सूची में मुख्यमंत्री भगवंत मान को धुरी से दोबारा उम्मीदवार बनाया गया। विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को कोटकपूरा और संजीव अरोड़ा को लुधियाना पश्चिम से चुनाव लड़ने का मौका दिया गया।
पार्टी ने इस सूची में कई मौजूदा विधायकों पर भरोसा जताया है। AAP का कहना है कि उम्मीदवारों के चयन में सर्वे और जनता से मिले फीडबैक को आधार बनाया गया है।
हालांकि, सूची सामने आने के बाद ही दो विधायकों का इस्तीफा आना पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा करने वाला घटनाक्रम है।
सनौर और समाना में पहले ही बदल चुके थे संगठनात्मक समीकरण
दोनों विधायकों के इस्तीफे के पीछे पार्टी के भीतर चल रहे राजनीतिक समीकरण भी चर्चा में हैं।
सनौर विधानसभा क्षेत्र में AAP ने रंजोध हडाना को नया हलका प्रभारी नियुक्त किया था। दूसरी तरफ समाना में सुरजीत सिंह रखड़ा को यह जिम्मेदारी दी गई थी।
इन नियुक्तियों के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई थी कि आगामी चुनाव में पार्टी दोनों सीटों पर नए चेहरों को मौका दे सकती है।
इसके अलावा चेतन सिंह जौड़ामाजरा पहले भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। मंत्रिमंडल में बदलाव के दौरान उन्हें पद से हटा दिया गया था।
हरमीत सिंह पठानमाजरा और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेदों की खबरें भी पहले सामने आ चुकी हैं।
अमित शाह के दौरे से बीजेपी ने भी तेज की पंजाब में तैयारी
दूसरी तरफ बीजेपी पंजाब में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए लगातार सक्रिय दिखाई दे रही है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया पंजाब दौरे के दौरान नशे का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। शाह ने राज्य में चिट्टे और ड्रग्स के बढ़ते कारोबार को लेकर AAP सरकार पर सवाल उठाए थे।
उन्होंने दावा किया था कि 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को नशे के कारोबार से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
अमित शाह ने नशे के खिलाफ लड़ाई में सख्त कार्रवाई की बात कही और राज्य सरकार को भी इस मुद्दे पर घेरा।
बीजेपी के लिए पंजाब में नशे का मुद्दा आगामी विधानसभा चुनाव में प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में से एक बन सकता है।
क्या दो विधायकों के जाने से AAP की चुनावी रणनीति प्रभावित होगी?
आम आदमी पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में पंजाब में बड़ी जीत हासिल करके सरकार बनाई थी। अब पार्टी के सामने 2027 में सत्ता बरकरार रखने की चुनौती है।
ऐसे समय में दो मौजूदा विधायकों का इस्तीफा राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण है। खासकर तब, जब चुनावी उम्मीदवारों की घोषणा का सिलसिला शुरू हो चुका है।
दोनों विधायकों के बीजेपी में जाने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं, हालांकि इसे अभी संभावित राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि AAP नेतृत्व इस घटनाक्रम पर क्या प्रतिक्रिया देता है और दोनों नेता आगे अपनी राजनीतिक पारी किस दल के साथ शुरू करते हैं।
पंजाब की राजनीति में आने वाले दिनों में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
