हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने सनौर के समर्थकों के साथ पार्टी से अलग होने का ऐलान किया।
पंजाब की अकाली राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पूर्व सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा के पार्टी से अलग होने के बाद अब उनके बेटे हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने भी शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत से नाता तोड़ लिया है। गुरुवार को पटियाला स्थित गुरुद्वारा श्री दुखनिवारण साहिब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने सनौर हलके के पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ सामूहिक रूप से पार्टी छोड़ने की घोषणा की।
यह घटनाक्रम प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा के फैसले के अगले ही दिन सामने आया है। इससे पार्टी को सनौर क्षेत्र में बड़ा राजनीतिक झटका लग सकता है।
पिता के फैसले के समर्थन में आए कार्यकर्ता
हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने बताया कि उनके पिता ने पार्टी छोड़ने का निर्णय कार्यकर्ताओं के विचार और सुझाव जानने के बाद लिया था। उन्होंने कहा कि घोषणा के बाद सनौर हलके से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के फोन आए। इसके बाद बैठक बुलाई गई, जिसमें सभी ने प्रो. चंदूमाजरा के फैसले का समर्थन किया।
उन्होंने सनौर के लोगों के साथ अपने परिवार के पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि क्षेत्र के लोगों ने वर्ष 1985 से लेकर 2017 के चुनाव तक प्रो. चंदूमाजरा का लगातार साथ दिया है।
संघर्ष और पंजाब के मुद्दों को लेकर रखी अपनी बात
प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरिंदरपाल सिंह ने अपने पिता के राजनीतिक सफर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने विद्यार्थी जीवन से ही पंजाब के अधिकारों और पंथक मुद्दों के लिए आवाज उठाई। आपातकाल के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा और संसद में उन्होंने पंजाब के मसलों को प्रमुखता से उठाया।
हरिंदरपाल सिंह ने आरोप लगाया कि पार्टी पंजाब सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रभावी आंदोलन खड़ा करने में सफल नहीं रही। उनके मुताबिक, विरोध का तरीका अखबारों और सोशल मीडिया तक सीमित रह गया था। उन्होंने कहा कि संघर्ष की राजनीति करने वाले नेताओं से लोगों को धरातल पर सक्रिय भूमिका निभाने की उम्मीद रहती है।
पंथक एकता को लेकर मतभेद बने अलगाव की वजह
हरिंदरपाल सिंह ने अकाली राजनीति में एकता की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रो. चंदूमाजरा चाहते थे कि बिखरी हुई अकाली शक्ति को एक मंच पर लाया जाए और पंथक एकता को मजबूत किया जाए।
हालांकि, उन्होंने दावा किया कि इस विषय पर ज्ञानी हरप्रीत सिंह की प्रतिक्रिया से दोनों पक्षों की सोच और कार्यशैली में अंतर महसूस हुआ। उनके अनुसार, जब विचारों में तालमेल नहीं रहता तो अलग रास्ता चुनना ही उचित होता है।
450 के करीब डेलीगेट और कई पदाधिकारी भी हुए अलग
हरिंदरपाल सिंह के मुताबिक, पार्टी छोड़ने के फैसले में सनौर हलके के ब्लॉक समिति सदस्य, प्रदेश और जिला स्तर के नेता, 10 सर्कल अध्यक्ष तथा करीब 450 जिला और राज्य स्तरीय डेलीगेट शामिल रहे। उन्होंने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्यों की मौजूदगी का भी उल्लेख किया।
उनका कहना था कि यह फैसला किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की सामूहिक राय के आधार पर लिया गया है।
आगे किस दल के साथ जाएंगे, अभी तय नहीं
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि चंदूमाजरा परिवार का अगला राजनीतिक कदम क्या होगा। सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल में शामिल होने की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में हरिंदरपाल सिंह ने कहा कि अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं हुआ है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आगे की रणनीति तय करने से पहले कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की जाएगी। उनका कहना था कि किसी भी राजनीतिक निर्णय में पंजाब के हित और पंथक एकता को प्राथमिकता दी जाएगी।
अकाली नेताओं को एक मंच पर लाने की अपील
हरिंदरपाल सिंह ने बीबी जागीर कौर, गुरप्रताप सिंह वडाला, परमिंदर सिंह ढींढसा और सुच्चा सिंह छोटेपुर जैसे नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि सभी की सोच और काम करने का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन अकाली ताकत को एकजुट करने की भावना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने सभी नेताओं से इस दिशा में मिलकर प्रयास करने की अपील की और कहा कि उनके परिवार का अगला कदम भी कार्यकर्ताओं की राय के बाद ही सामने आएगा।
