मुख्यमंत्री भगवंत मान के पूर्व OSD मनजीत सिंह सिद्धू ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।
पंजाब की राजनीति में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के पूर्व OSD मनजीत सिंह सिद्धू ने आम आदमी पार्टी से अलग होकर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। उन्होंने चंडीगढ़ के सेक्टर-15 स्थित पंजाब कांग्रेस भवन में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष परगट सिंह मौजूद रहे।
कांग्रेस में शामिल होने के बाद सिद्धू ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर निशाना साधते हुए अपने फैसले की वजह बताई। उनके बयान को पंजाब की राजनीति में एक अहम राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
‘मैं पंजाब के साथ खड़ा हूं’, भगवंत मान पर साधा निशाना
कांग्रेस में शामिल होने के बाद मनजीत सिंह सिद्धू ने कहा, ‘वह कुर्सी के साथ खड़े हैं और मैं पंजाब के साथ खड़ा हूं। इसलिए हमारे रास्ते अलग-अलग हैं।’
उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है। सिद्धू को मुख्यमंत्री भगवंत मान के करीबी लोगों में गिना जाता रहा है। ऐसे में उनका कांग्रेस में शामिल होना राज्य की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
पंजाब के लिए देखे सपने पूरे नहीं हुए: सिद्धू
मनजीत सिंह सिद्धू ने कहा कि उन्होंने पंजाब को लेकर जो सपने देखे थे, वे पूरे नहीं हो पाए। वह लंबे समय से सही अवसर का इंतजार कर रहे थे और अब कांग्रेस के साथ जुड़कर पंजाब के लिए काम करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि सपने कभी खत्म नहीं होते और पंजाब को बेहतर बनाने की उम्मीद के साथ उन्होंने यह फैसला लिया है। सिद्धू ने राहुल गांधी की सामाजिक न्याय को लेकर सोच की भी सराहना की।
सचिन पायलट की भूमिका का किया जिक्र
सिद्धू ने कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट की भी प्रशंसा की। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व और सक्रियता से संगठन को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस में एक सदस्य के तौर पर काम करेंगे और सभी को साथ लेकर चलने का प्रयास करेंगे। उनके मुताबिक, उनका उद्देश्य किसी पद की इच्छा रखने के बजाय पंजाब और अपने क्षेत्र के लिए बेहतर काम करना है।
आगामी चुनावों से पहले अहम राजनीतिक घटनाक्रम
मनजीत सिंह सिद्धू के कांग्रेस में शामिल होने को पंजाब की राजनीति में बदलते समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, इस घटनाक्रम का आगामी विधानसभा चुनावों पर क्या असर होगा, यह आने वाले समय में पार्टी की रणनीति, जनसमर्थन और राजनीतिक गतिविधियों से स्पष्ट होगा।
