सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड के बाद फांसी की तारीख से पहले कई कानूनी प्रक्रियाएं बाकी हैं।
सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद अब लोगों के मन में एक सवाल है—दोनों को फांसी कब दी जाएगी?
फिलहाल इसकी कोई तारीख तय नहीं है। अदालत से मृत्युदंड मिलने के बाद सजा को अंतिम रूप से लागू करने से पहले कई कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होती हैं।
क्या तुरंत हो सकती है फांसी?
नहीं। सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को सीधे अमल में नहीं लाया जाता। मृत्युदंड के मामले में हाई कोर्ट की पुष्टि आवश्यक होती है।
यही इस मामले का पहला बड़ा कानूनी पड़ाव है।
हाई कोर्ट के बाद क्या होगा?
अगर हाई कोर्ट भी मृत्युदंड को बरकरार रखता है तो दोषियों के पास सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का रास्ता उपलब्ध हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई के बाद सजा को बरकरार रख सकता है या कानूनी आधार पर उसमें बदलाव कर सकता है।
राष्ट्रपति के पास भी है विकल्प
न्यायिक प्रक्रिया के बाद दोषियों की ओर से राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल की जा सकती है।
संविधान का अनुच्छेद 72 राष्ट्रपति को मृत्युदंड से जुड़े मामलों में संवैधानिक राहत देने की शक्ति प्रदान करता है।
फांसी की तारीख कब तय होगी?
यही वजह है कि अभी मुस्कान और साहिल की फांसी की तारीख बताना जल्दबाजी होगी।
मामले में हाई कोर्ट की पुष्टि, संभावित सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही और दया याचिका समेत उपलब्ध कानूनी उपायों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी।
पूरी प्रक्रिया में कितना समय लगेगा, इसकी कोई एक तय समय-सीमा नहीं बताई जा सकती। यह अदालतों में होने वाली कार्यवाही और दाखिल की जाने वाली याचिकाओं पर निर्भर करेगा।
