झोटा हत्याकांड और पंजाब में नशे के खिलाफ कार्रवाई को लेकर केंद्र ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी।
मानसा में परविंदर सिंह उर्फ झोटा की हत्या के बाद अब यह मामला केंद्र सरकार तक पहुंच गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से हत्याकांड की विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।
पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी को भेजे गए पत्र में घटना की पूरी जानकारी के साथ-साथ अब तक की गई कार्रवाई और आगे के कदमों का ब्योरा देने को कहा गया है।
विरोध प्रदर्शनों का भी किया गया जिक्र
केंद्र सरकार ने अपने पत्र में झोटा की हत्या के बाद पंजाब में हुए विरोध प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया है।
झोटा को नशीले पदार्थों और मन:प्रभावी दवाओं की कथित खुलेआम बिक्री तथा उनके दुरुपयोग के खिलाफ आवाज उठाने वाले व्यक्ति के तौर पर पत्र में बताया गया है।
सिर्फ हत्या नहीं, ड्रग कंट्रोल पर भी जवाब मांगा
केंद्र की मांग का दायरा केवल हत्या की जांच तक सीमित नहीं है। पंजाब सरकार को यह भी बताना होगा कि राज्य में नशे के खिलाफ केंद्र द्वारा तय दिशा-निर्देशों के मुताबिक अब तक क्या काम किया गया है।
इसमें Narcotics Control Vision Document 2026-2029 के तहत उठाए गए कदमों की जानकारी शामिल है।
किन मुद्दों पर मांगी गई जानकारी?
पंजाब सरकार से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है, जिनमें:
- एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स से जुड़े कदम
- ड्रग मामलों में वित्तीय जांच
- NDPS मामलों में अभियोजन व्यवस्था
- नशे से जुड़े मामलों की समीक्षा
- NDPS अदालतों को मजबूत करने के उपाय
- नोडल अधिकारियों की नियुक्ति
- अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क पर कार्रवाई
शामिल हैं।
2029 तक नशामुक्त भारत का लक्ष्य
केंद्र के विजन डॉक्यूमेंट में 2026 से 2029 के दौरान नशे के खिलाफ रणनीतिक और समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया गया है।
अब केंद्र ने पंजाब सरकार से पूछा है कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए राज्य में जमीन पर क्या कदम उठाए गए हैं।
झोटा केस में आगे क्या?
अब पंजाब सरकार को केंद्र को हत्याकांड से संबंधित तथ्यात्मक रिपोर्ट के साथ-साथ नशे के खिलाफ राज्य में चल रही कार्रवाई की जानकारी भी देनी होगी।
इस रिपोर्ट के जरिए यह भी स्पष्ट हो सकता है कि पंजाब में ड्रग नेटवर्क पर कार्रवाई, वित्तीय जांच और अभियोजन को लेकर सरकार ने अब तक क्या प्रगति की है।
