Neha Bora AISA president Delhi High Court peace bond petition
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका पर शुक्रवार को फैसला आ गया। अदालत ने दिल्ली पुलिस के उस नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी, जिसमें नेहा बोरा को शांति बनाए रखने के लिए ₹10 हजार का निजी बॉन्ड भरने के लिए कहा गया था।
यह नोटिस BNSS की धारा 126 के तहत जारी किया गया था।
17 अक्टूबर को मिला था पुलिस का नोटिस
दिल्ली पुलिस की ओर से नेहा बोरा को 17 अक्टूबर को नोटिस दिया गया था। उन्हें विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट यानी SEM के सामने पेश होकर यह बताने को कहा गया था कि जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए उनसे ₹10 हजार का निजी बॉन्ड और एक जमानतदार क्यों न लिया जाए।
नेहा बोरा ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था।
नोटिस रद्द कराने की मांग
अपनी याचिका में नेहा बोरा ने पुलिस की कार्रवाई को रद्द करने की मांग की थी। उन्होंने अदालत से यह भी अनुरोध किया था कि पुलिस को उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई करने से रोका जाए।
मामले में दिल्ली पुलिस ने याचिका का विरोध किया था।
पुलिस ने याचिका की वैधता पर उठाया सवाल
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने दलील दी थी कि नेहा बोरा की याचिका मेंटेनेबल नहीं है।
जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद गुरुवार को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई करीब तीन घंटे चली थी।
हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया?
शुक्रवार शाम को अदालत ने नेहा बोरा की याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने मामले में विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के लिए कुछ निर्देश भी जारी किए हैं।
इसलिए अदालत का फैसला केवल याचिका खारिज होने तक सीमित नहीं है, बल्कि SEM के समक्ष आगे की प्रक्रिया को लेकर भी निर्देश दिए गए हैं।
BNSS की धारा 126 क्या कहती है?
PTI के मुताबिक, BNSS की धारा 126 के तहत विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट किसी व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरवाने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
इसके लिए संबंधित व्यक्ति द्वारा शांति भंग करने, सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा डालने या अशांति पैदा करने की आशंका से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी का आधार होना चाहिए।
