SIR electoral roll controversy and powers of Chief Election Commissioner under Section 18
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहे विवाद में चुनाव आयोग के निर्णय लेने की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। इसी वजह से CEC Act की Section 18 इस पूरे कानूनी विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।
सवाल यह है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त किसी फैसले को अकेले ले सकते हैं या फिर तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का पालन जरूरी है।
तीन सदस्यीय आयोग में कैसे लिया जाता है फैसला?
चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त शामिल होते हैं। 2023 के कानून की धारा 18 आयोग के आंतरिक कामकाज और निर्णय प्रक्रिया का कानूनी ढांचा बताती है।
धारा 18(1) आयोग को अपने कामकाज की प्रक्रिया तय करने और सदस्यों के बीच काम बांटने की व्यवस्था देती है।
वहीं धारा 18(2) में सर्वसम्मति को प्राथमिकता दी गई है। यदि सदस्यों के बीच मतभेद हो जाए तो बहुमत की राय से फैसला लिया जा सकता है।
क्या CEC का वोट सबसे ऊपर होता है?
इस प्रावधान के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि CEC की राय हर परिस्थिति में अंतिम होती है।
यदि तीन सदस्यीय आयोग में दो सदस्य एक राय पर हैं और तीसरे सदस्य की राय अलग है, तो बहुमत का फैसला प्रभावी हो सकता है।
यानी CEC के पास इस व्यवस्था में ऐसा अलग वीटो अधिकार नहीं है जिससे वह हर मामले में बाकी दोनों आयुक्तों की राय को निष्प्रभावी कर दें।
SIR को लेकर क्या विवाद है?
SIR से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर आरोप लगाए गए कि आयोग के भीतर मतभेद थे और कुछ निर्णयों पर अन्य सदस्यों ने आपत्तियां जताई थीं।
इसी संदर्भ में मीडिया रिपोर्टों में भी चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों का उल्लेख किया गया।
हालांकि, ECI ने सुप्रीम कोर्ट में इन आरोपों से असहमति जताई है और कहा है कि जिन तीन SIR आदेशों पर सवाल उठाया जा रहा है, वे सर्वसम्मति से पारित किए गए थे।
ECI का क्या कहना है?
चुनाव आयोग ने कहा कि बैठकों और फाइलों पर अधिकारियों या सदस्यों की ओर से की गई टिप्पणियां और सवाल अंतिम निर्णय के समान नहीं हैं।
ECI के अनुसार संबंधित मामलों पर विचार-विमर्श हुआ, फाइलें सदस्यों के सामने रखी गईं और अंतिम निर्णय आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज किए गए।
आयोग ने यह भी कहा कि उसका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाबी हलफनामा भी तीनों सदस्यों की सहमति से मंजूर हुआ।
Section 18 से ज्ञानेश कुमार को कैसे राहत मिल सकती है?
अगर अदालत ECI के इस तर्क को स्वीकार करती है कि SIR के संबंधित अंतिम आदेश वास्तव में आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत सर्वसम्मति से पारित हुए थे, तो CEC के खिलाफ एकतरफा निर्णय लेने से जुड़े आरोपों का आधार कमजोर हो सकता है।
दूसरी ओर, यदि अदालत यह मानती है कि किसी महत्वपूर्ण निर्णय पर औपचारिक असहमति थी और कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, तो मामला अलग दिशा ले सकता है।
इसलिए इस विवाद में केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि किसी फाइल पर आपत्ति या टिप्पणी की गई थी। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वह आपत्ति अंतिम निर्णय से संबंधित थी या केवल निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा।
अंतिम राहत या कार्रवाई पर फैसला अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगा।
