Punjab Culture: हॉकी स्टेडियम में दिखी पंजाबी गांवों की विरासत, युवाओं को जोड़ रहा ‘साडा पिंड’
आधुनिक खेल आयोजन के बीच पंजाब की पुरानी संस्कृति और ग्रामीण जीवनशैली को प्रदर्शित करने की अनूठी पहल सामने आई है। जालंधर के सुरजीत हॉकी स्टेडियम में एशियन हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान जिला प्रशासन ने ‘साडा पिंड’ नाम से एक विशेष सांस्कृतिक परिसर तैयार किया है। इसका मकसद नई पीढ़ी को पंजाब की परंपराओं और अपनी जड़ों से जोड़ना है।
बर्लटन पार्क में बने इस परिसर में पंजाब के पुराने गांवों की झलक पेश की गई है। यहां आने वाले लोगों को पारंपरिक ग्रामीण घरों, घरेलू सामान और लोक संस्कृति से जुड़ी कई चीजें देखने को मिल रही हैं।
युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने की कोशिश
अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर अमनिंदर कौर बराड़ ने ‘साडा पिंड’ का दौरा किया और वहां मौजूद लोगों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल खास तौर पर शहरी क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने में मददगार है।
उनके मुताबिक, स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों सहित हर दिन सैकड़ों लोग इस परिसर को देखने पहुंच रहे हैं। यहां पंजाब के पारंपरिक जीवन को करीब से समझने का अवसर मिल रहा है।
पुराने पंजाबी घरों और ग्रामीण जीवन की झलक
‘साडा पिंड’ में देसी मंजी, पारंपरिक कढ़ाई, गेहूं रखने के पुराने ढांचे, विरासती पानी का कुआं और रंगीन दीवारों पर बनी लोक कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं। इसके साथ ही पंजाब में हॉकी के गौरवशाली इतिहास को दर्शाने के लिए ‘हॉकी ग्लोरी वॉल’ भी बनाई गई है।
यहां आने वाले दर्शकों को ग्रामीण जीवन के उन पहलुओं से रूबरू होने का मौका मिल रहा है, जो आधुनिक जीवनशैली के बीच धीरे-धीरे पीछे छूटते जा रहे हैं।
खेल और संस्कृति का अनोखा संगम
एशियन हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी ने जालंधर को अंतरराष्ट्रीय खेल गतिविधियों का केंद्र बनाया है। इसी आयोजन के साथ ‘साडा पिंड’ ने पंजाब की सांस्कृतिक पहचान को भी सामने लाने का काम किया है।
अमनिंदर कौर बराड़ ने कहा कि हॉकी का पंजाब की संस्कृति से गहरा रिश्ता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता के दौरान पारंपरिक पंजाबी गांव की झलक पेश करना आयोजन को और खास बनाता है।
जिला प्रशासन की यह पहल खेल प्रेमियों, विद्यार्थियों और अन्य आगंतुकों को एक ही जगह पर हॉकी के गौरव और पंजाब की ग्रामीण विरासत से जुड़ने का अवसर दे रही है।
