दिल्ली में कांग्रेस और विपक्षी दलों की महारैली के बाद व्यापारिक संगठनों ने नाराजगी जाहिर की है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) का आरोप है कि दीपावली से ठीक पहले रामलीला मैदान में आयोजित रैली और राहुल गांधी के मार्च के कारण राजधानी के प्रमुख बाजारों में कारोबार प्रभावित हुआ। संगठन ने व्यापारियों को 10 से 12 हजार करोड़ रुपये तक का नुकसान होने का अनुमान लगाया है।
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार, व्यापारियों ने पहले ही रैली के समय और स्थान को लेकर अपनी चिंता जताई थी। उनका कहना है कि मध्य दिल्ली के कई इलाकों में यातायात प्रभावित होने से ग्राहकों को बाजारों तक पहुंचने में परेशानी हुई।
25 बाजारों में कारोबार प्रभावित होने का दावा
CTI के मुताबिक, रामलीला मैदान के आसपास के करीब 25 बाजारों में व्यापार पर असर पड़ा। इनमें कश्मीरी गेट, चांदनी चौक, भागीरथ पैलेस, सदर बाजार, करोल बाग, पहाड़गंज और कनॉट प्लेस जैसे प्रमुख बाजार शामिल हैं।
संगठन का दावा है कि कई बड़े बाजारों में लगभग 80 प्रतिशत दुकानें बंद रहीं। इसके अलावा दिल्ली के अलग-अलग व्यापारिक क्षेत्रों की करीब ढाई लाख दुकानों के प्रभावित होने का अनुमान जताया गया है।
राहुल गांधी को चार बार लिखे गए पत्र
CTI ने दावा किया कि रैली से पहले राहुल गांधी को चार पत्र भेजे गए थे। व्यापारियों ने दीपावली के त्योहार को देखते हुए रैली की तारीख बदलने, आयोजन स्थगित करने या किसी अन्य स्थान पर करने का अनुरोध किया था।
संगठन के अनुसार, पहला पत्र 24 अक्टूबर को भेजा गया था। इसके बाद 27 और 28 अक्टूबर को राहुल गांधी से मुलाकात के लिए 20 मिनट का समय मांगा गया। व्यापारियों का कहना था कि वे सीधे बातचीत कर रैली से होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान के बारे में अपनी चिंताएं बताना चाहते थे।
CTI ने 1 नवंबर को रैली के दिन भी चौथा पत्र भेजकर बाजारों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर चिंता जताई थी।
अन्य व्यापारिक संगठनों ने भी जताई चिंता
इस मामले में किराना कमिटी दिल्ली और नट्स एंड ड्राई फ्रूट्स काउंसिल ने भी व्यापारिक नुकसान को लेकर चिंता जाहिर की है। व्यापारियों का कहना है कि दीपावली से पहले बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बेहद महत्वपूर्ण होती है। यातायात बाधित होने से खरीदारी प्रभावित होती है और इसका असर दुकानदारों की बिक्री पर पड़ता है।
CTI ने नुकसान का अनुमान 10 से 12 हजार करोड़ रुपये बताया है। हालांकि, यह संगठन का दावा है और वास्तविक आर्थिक नुकसान का स्वतंत्र सत्यापन सामने नहीं आया है। व्यापारिक संगठनों की मांग है कि भविष्य में त्योहारों के दौरान बड़े आयोजनों की योजना बनाते समय बाजारों और व्यापारियों के हितों का भी ध्यान रखा जाए।
