मंडौली और पबरी के जल शोधन केंद्रों से पटियाला क्षेत्र के 316 गांवों तक नहरी पानी पहुंचाने की योजना है।
पंजाब के पटियाला और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पेयजल की समस्या को दूर करने के लिए दो बड़े जल शोधन केंद्र शुरू किए गए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने 2 नवंबर को मंडौली गांव में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंडौली और पबरी में तैयार किए गए इन केंद्रों को जनता को समर्पित किया।
करीब 432.65 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना के माध्यम से पांच विधानसभा क्षेत्रों के 316 गांवों तक साफ नहरी पानी पहुंचाने की योजना है। इसके तहत लगभग 75 हजार परिवारों और करीब 4.5 लाख लोगों को लाभ मिलने का अनुमान है। पानी की आपूर्ति के लिए 752 किलोमीटर लंबा ट्रांसमिशन पाइपलाइन नेटवर्क तैयार किया गया है। Yes Punjab News+2
पांच विधानसभा क्षेत्रों के गांवों को मिलेगा लाभ
इस परियोजना में घनौर, राजपुरा, सनौर, पटियाला ग्रामीण और शंभू कलां विधानसभा क्षेत्रों के गांव शामिल हैं। इन इलाकों में भूजल की गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है।
कुछ गांवों में भूजल के भीतर फ्लोराइड और भारी धातुओं की अधिक मात्रा पाई गई है। ऐसे में सरकार ने नहरी पानी को शुद्ध करके ग्रामीण परिवारों तक पहुंचाने का विकल्प तैयार किया है। इसका उद्देश्य लोगों को पीने के पानी के लिए दूषित भूजल पर निर्भर रहने से बचाना है।
दो प्लांट पर खर्च हुए 432.65 करोड़ रुपये
परियोजना के तहत मंडौली और पबरी में दो आधुनिक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए गए हैं। इनके निर्माण पर खर्च का विवरण इस प्रकार है:
- मंडौली प्लांट: लगभग 266.20 करोड़ रुपये।
- पबरी प्लांट: लगभग 166.46 करोड़ रुपये।
- कुल लागत: लगभग 432.65 करोड़ रुपये।
इन केंद्रों में नहरी पानी को शुद्ध करने के बाद पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए गांवों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। पानी के भंडारण और वितरण के लिए गांवों में पहले से मौजूद ढांचे को भी मजबूत किया गया है। Aam Aadmi Party+2
पानी की जांच के लिए बनाई गई प्रयोगशालाएं
परियोजना में केवल पानी की आपूर्ति ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता की निगरानी पर भी ध्यान दिया गया है। जल शोधन केंद्रों में आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जहां पानी के नमूनों की नियमित जांच की जाएगी।
सरकारी जानकारी के अनुसार, पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए pH और टर्बिडिटी जैसे मानकों पर भी नजर रखी जाएगी। इससे शुद्धिकरण के बाद पानी की स्थिति की निगरानी करने में मदद मिलेगी।
SCADA प्रणाली से होगी जलापूर्ति की निगरानी
दोनों जल शोधन केंद्रों और जल भंडारण व्यवस्था में SCADA आधारित निगरानी प्रणाली लगाई गई है। इसकी मदद से पानी के प्रवाह और वितरण से जुड़ी जानकारी पर नजर रखी जा सकेगी।
जल भंडारण टंकियों में स्वचालित सेंसर, ओवरफ्लो अलार्म और पंप नियंत्रण से जुड़े उपकरण लगाए गए हैं। इन तकनीकों का उद्देश्य जलापूर्ति व्यवस्था को सुचारु रखना और किसी समस्या की स्थिति में समय पर जानकारी उपलब्ध कराना है। The Times of India+2
2049 तक की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार हुई योजना
सरकार के मुताबिक, मंडौली और पबरी के दोनों प्लांट क्षेत्र की पेयजल जरूरतों को वर्ष 2049 तक ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। इनके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी परियोजना का काम करने वाली कंपनी को अगले 10 वर्षों के लिए सौंपी गई है।
इसके अलावा सभी 316 गांवों में जल आपूर्ति और स्वच्छता समितियां गठित की गई हैं। इन समितियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर पानी की आपूर्ति और व्यवस्था की निगरानी में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। The Times of India+1
शहरी इलाकों में भी सतही जल परियोजनाओं पर काम
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ बड़े शहरों में भी साफ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए योजनाएं बना रही है। लुधियाना, अमृतसर, जालंधर और पटियाला जैसे शहरों में सतही जल आधारित परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।
इन योजनाओं के जरिए शहरी आबादी को साफ पानी उपलब्ध कराने और भूजल पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इन शहरी परियोजनाओं से करीब 78 लाख लोगों को लाभ पहुंचाने की योजना है। The Times of India+1
भूजल संरक्षण की दिशा में पहल
पंजाब के कई हिस्सों में भूजल का इस्तेमाल और उसकी गुणवत्ता दोनों बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे में नहरी पानी को शुद्ध करके पेयजल के रूप में उपलब्ध कराने की यह परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना लोगों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता से जुड़ा विषय है। अब इस परियोजना का वास्तविक लाभ गांवों तक नियमित और सुरक्षित जलापूर्ति के रूप में पहुंचना महत्वपूर्ण होगा।
