अमेरिकी चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत के बाद ट्रम्प प्रशासन के खिलाफ जांच की तैयारी।
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इससे ट्रम्प के बाकी कार्यकाल में विपक्ष की निगरानी और जांच की ताकत बढ़ जाएगी।
डेमोक्रेटिक सांसदों ने ट्रम्प प्रशासन के खिलाफ कई जांचों की योजना बनाई है। इनमें राष्ट्रपति के परिवार के कारोबारी सौदे, जेफ्री एपस्टीन मामले से जुड़े दस्तावेज और इमिग्रेशन एजेंसी ICE की कार्रवाई शामिल हैं। विपक्षी सांसदों के आरोप हैं कि ट्रम्प ने राष्ट्रपति पद का इस्तेमाल अपने परिवार और करीबी लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए किया। महाभियोग की संभावना भी चर्चा में है, लेकिन फिलहाल ट्रम्प को हटाने की कोई प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।
हाउस और सीनेट में डेमोक्रेट्स की बढ़त
प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर चुनाव हुए। 5 नवंबर तक उपलब्ध नतीजों के अनुसार डेमोक्रेट्स 240 सीटें जीत चुके थे और रिपब्लिकन पार्टी को 147 सीटें मिली थीं। बाकी सीटों पर नतीजे आने बाकी थे। इस तरह डेमोक्रेट्स ने सदन में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया।
सीनेट में 100 सीटें हैं और इस चुनाव में 35 सीटों पर मतदान हुआ। 33 सीटों के घोषित नतीजों में डेमोक्रेट्स ने 20 और रिपब्लिकन ने 13 सीटें जीतीं। दो सीटों पर मुकाबला बाकी था। कुल संख्या में डेमोक्रेटिक खेमे के पास 54 और रिपब्लिकन के पास 44 सीटें थीं। डेमोक्रेटिक खेमे में दो निर्दलीय सदस्य भी शामिल हैं।
गवर्नर चुनावों में भी डेमोक्रेट्स ने 22 सीटें जीतीं, जबकि रिपब्लिकन को 12 सीटें मिलीं। दो राज्यों के नतीजे घोषित होना बाकी थे।
रॉबर्ट गार्सिया ने बनाई जांच की रूपरेखा
डेमोक्रेटिक सांसद रॉबर्ट गार्सिया ने कहा है कि बहुमत मिलने के बाद उनकी पार्टी ट्रम्प प्रशासन से जुड़े कई मामलों की जांच करेगी। गार्सिया का ध्यान ट्रम्प परिवार के कारोबारी लेन-देन, जेफ्री एपस्टीन मामले में प्रशासन की भूमिका और ICE की कार्रवाई पर रहेगा।
ट्रम्प के बेटों और दामाद जेरेड कुशनर के कारोबारी सौदे भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। विपक्ष यह पता लगाना चाहता है कि राष्ट्रपति के पद और सरकारी प्रभाव से परिवार के कारोबार को कोई फायदा मिला या नहीं।
डेमोक्रेट्स का कहना है कि संसद की निगरानी समितियां दस्तावेज मांग सकेंगी और अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुला सकेंगी। जांच में गड़बड़ी के सबूत मिलने पर आगे की राजनीतिक या कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी खुल सकता है।
प्रवासियों पर कार्रवाई बनी चुनावी मुद्दा
मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबॉम ने अमेरिका में प्रवासियों के खिलाफ ICE की छापेमारी और कथित नस्लीय भेदभाव को लेकर टिप्पणी की है। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से हिस्पैनिक समुदाय के मतदाताओं में ट्रम्प की पार्टी के प्रति नाराजगी बढ़ी।
पिछले राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प को हिस्पैनिक मतदाताओं का अच्छा समर्थन मिला था। शिनबॉम के अनुसार, इस बार प्रवासियों के साथ व्यवहार और नस्ल के आधार पर निशाना बनाए जाने की शिकायतों ने मतदाताओं के रुख को प्रभावित किया।
ट्रम्प की शक्तियां पूरी तरह खत्म नहीं होंगी
कांग्रेस में डेमोक्रेट्स के बहुमत के बावजूद राष्ट्रपति के अधिकार बने रहेंगे। ट्रम्प किसी विधेयक पर वीटो लगा सकते हैं। हालांकि, कांग्रेस के दोनों सदन दो-तिहाई बहुमत से वीटो को पलट सकते हैं।
राष्ट्रपति कार्यकारी आदेश जारी कर सकते हैं, सरकारी एजेंसियों को निर्देश दे सकते हैं और विदेश नीति से जुड़े फैसले ले सकते हैं। उन्हें संघीय अपराधों में माफी देने का अधिकार भी है। न्यायाधीशों और वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियों में भी उनकी भूमिका रहेगी, लेकिन कई नियुक्तियों को सीनेट की मंजूरी की जरूरत होगी।
नए सांसद जनवरी 2027 में पद संभालेंगे। तब तक मौजूदा कांग्रेस काम करेगी। नई कांग्रेस के कार्यभार संभालने के बाद डेमोक्रेट्स को जांच और निगरानी के लिए अधिक संसदीय अधिकार मिलेंगे।
अलास्का में दूसरे डैन सुलिवन को लेकर चुनावी विवाद
अलास्का के सीनेट चुनाव में एक ही नाम के दो उम्मीदवारों के मैदान में होने से विवाद खड़ा हुआ। रिपब्लिकन पार्टी के मौजूदा सीनेटर डैन सुलिवन के सामने निर्दलीय उम्मीदवार डैनियल जे. सुलिवन जूनियर भी चुनाव लड़ रहे हैं।
रिपोर्टों में दावा किया गया कि मैरी पेल्टोला के चुनाव अभियान से जुड़े लोगों ने दूसरे डैन सुलिवन को मैदान में लाने में भूमिका निभाई। आरोप था कि इससे रिपब्लिकन उम्मीदवार के वोट बंट सकते हैं। पेल्टोला ने इस योजना की जानकारी होने से इनकार किया है।
ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दूसरे उम्मीदवार को ‘फेक डैन सुलिवन’ बताया और कहा कि उनके वोट असली डैन सुलिवन को मिलने चाहिए। हालांकि, अलास्का की चुनाव प्रणाली में मतदाता उम्मीदवारों की प्राथमिकता भी दर्ज कर सकते हैं।
अब्दुल अल-सैयद बोले- जनता के लिए किसी के साथ काम करने को तैयार
मिशिगन से सीनेट चुनाव जीतने वाले अब्दुल अल-सैयद ने कहा है कि वह राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ भी काम करने को तैयार हैं, यदि इससे अमेरिकी जनता को फायदा होता है। उन्होंने कहा कि राजनीति का मकसद बदला लेना नहीं, बल्कि कानून का पालन कराना और लोगों के हित में काम करना होना चाहिए।
अल-सैयद ने चुनाव जीतने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की लागत कम करने और राजनीति में बड़े कारोबारी हितों के प्रभाव को घटाने को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। The Washington Post+1
चीन के साथ व्यापार और ताइवान पर बातचीत अहम
अमेरिकी चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बावजूद चीन ट्रम्प प्रशासन के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ट्रम्प की आगामी मुलाकातों में व्यापार समझौते के साथ ताइवान का मुद्दा भी चर्चा में रह सकता है।
अमेरिका ताइवान को हथियार और रक्षा सहायता देता रहा है। चीन इसका विरोध करता है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, 14 अरब डॉलर का एक हथियार पैकेज फिलहाल रुका हुआ है। ताइवान ने कहा है कि अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग जारी है, लेकिन नई बिक्री की समयसीमा को लेकर अनिश्चितता है।
ट्रम्प के खिलाफ पहले भी दो बार महाभियोग की कार्रवाई
ट्रम्प के पहले राष्ट्रपति कार्यकाल में दो बार महाभियोग प्रस्ताव प्रतिनिधि सभा से पारित हुए थे। 2019 में यूक्रेन के राष्ट्रपति पर जो बाइडेन और उनके बेटे हंटर बाइडेन से जुड़ी जांच की घोषणा करने के लिए दबाव डालने का आरोप लगा था। इस दौरान यूक्रेन को मिलने वाली सैन्य सहायता रोकने का मामला भी उठा।
दूसरी कार्रवाई 2021 में कैपिटल हिल पर समर्थकों के हमले के बाद हुई। ट्रम्प पर अपने भाषण और बयानों से समर्थकों को भड़काने का आरोप लगाया गया था। दोनों मामलों में प्रतिनिधि सभा ने महाभियोग प्रस्ताव पारित किया, लेकिन सीनेट में दो-तिहाई समर्थन नहीं मिलने के कारण उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया।
महाभियोग में हाउस और सीनेट की अलग-अलग भूमिका
अमेरिकी संविधान के मुताबिक, प्रतिनिधि सभा साधारण बहुमत से राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग के आरोप पारित कर सकती है। इसके बाद सीनेट में मुकदमे जैसी सुनवाई होती है।
सीनेट में राष्ट्रपति को दोषी ठहराने के लिए मौजूद सदस्यों के दो-तिहाई वोट जरूरी हैं। यदि सभी 100 सदस्य मौजूद हों, तो 67 वोटों की जरूरत होगी। इसका मतलब है कि डेमोक्रेट्स के पास दोनों सदनों में बहुमत होने के बावजूद राष्ट्रपति को हटाने के लिए सीनेट में अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा।
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पर भी संकट, अगले हफ्ते वोटिंग संभव
चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पर भी दबाव बढ़ गया है। ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और युद्ध से बाहर निकलने की रणनीति को लेकर उनकी आलोचना हो रही है।
रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने कहा है कि वह अगले सप्ताह प्रतिनिधि सभा में हेगसेथ के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर मतदान कराने की कोशिश करेंगे। कुछ रिपब्लिकन नेताओं को उम्मीद है कि प्रस्ताव को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, ट्रम्प ने हेगसेथ का बचाव किया है और उन्हें पद से हटाने की बात से इनकार किया है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर है: हेगसेथ के खिलाफ प्रस्ताव रक्षा मंत्री के तौर पर उनकी भूमिका को लेकर है, जबकि ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग की चर्चा अलग राजनीतिक और जांच प्रक्रिया से जुड़ी है।
