सरकारी स्वच्छता अभियान में रेलवे ने सबसे ज्यादा कबाड़ बेचकर कमाई की।
सरकारी दफ्तरों में जमा पुराने सामान और कबाड़ को हटाना केंद्र सरकार के लिए इस बार बड़ी कमाई का जरिया बन गया। विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 के तहत एक महीने तक चले अभियान में सरकारी विभागों ने कबाड़ और ई-कचरे का निपटारा करके 970.33 करोड़ रुपये जुटाए। कमाई के मामले में रेलवे ने सभी विभागों को पीछे छोड़ दिया। रेलवे बोर्ड ने अकेले 618.06 करोड़ रुपये की राशि हासिल की।
2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक चले इस अभियान में देशभर के सरकारी कार्यालयों, संस्थानों और अन्य स्थानों पर सफाई की गई। इसका मकसद केवल गंदगी हटाना नहीं था, बल्कि लंबे समय से बेकार पड़ी सामग्री को बाहर निकालना, खाली जगह का बेहतर इस्तेमाल करना और सरकारी कामकाज को अधिक व्यवस्थित बनाना भी था।
पिछले अभियान से 16 प्रतिशत ज्यादा कमाई
कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, इस बार कबाड़ और ई-कचरे के निपटान से हुई कमाई पिछले अभियान के मुकाबले लगभग 16 प्रतिशत अधिक रही। सरकार को कुल 970.33 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
इसमें इलेक्ट्रॉनिक कचरे का निपटारा भी शामिल था। ई-कचरे को हटाने से करीब 50 करोड़ रुपये मिले। वर्ष 2021 में वार्षिक विशेष स्वच्छता अभियान की शुरुआत के बाद इस बार कई प्रमुख मानकों पर सबसे अच्छा प्रदर्शन दर्ज किया गया।
इस अभियान के जरिए सरकारी कार्यालयों में पड़े पुराने उपकरणों, अनुपयोगी सामग्री और कबाड़ को हटाकर उनसे आर्थिक लाभ हासिल किया गया।
कमाई की सूची में रेलवे सबसे ऊपर
सरकारी विभागों में कबाड़ बेचकर सबसे अधिक रकम रेलवे बोर्ड ने जुटाई। रेलवे की कमाई 618.06 करोड़ रुपये रही। दूसरे स्थान पर रक्षा मंत्रालय का सैन्य मामलों का विभाग रहा, जिसने 88.96 करोड़ रुपये हासिल किए।
कोयला मंत्रालय ने 61.41 करोड़ रुपये की कमाई की, जबकि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के खाते में 34.81 करोड़ रुपये आए।
इन आंकड़ों में रेलवे की कमाई बाकी विभागों के मुकाबले काफी अधिक रही। कुल 970.33 करोड़ रुपये की कमाई में रेलवे का योगदान सबसे बड़ा रहा।
सफाई के मामले में भी बढ़ा प्रदर्शन
अभियान के दौरान देशभर में सफाई का काम बड़े स्तर पर किया गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कुल 19,88,826 स्थानों पर सफाई की गई। पिछले साल अभियान के दौरान 11,59,783 स्थानों पर सफाई हुई थी।
इस तरह इस बार सफाई किए गए स्थानों की संख्या में लगभग 71 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह अभियान के विस्तार और इसमें शामिल सरकारी विभागों की गतिविधियों को दर्शाता है।
सफाई के साथ-साथ सरकारी परिसरों में अनुपयोगी सामान हटाकर जगह खाली कराने पर भी ध्यान दिया गया।
सरकारी कार्यालयों में 277.82 लाख वर्ग फीट जगह खाली
एक महीने के अभियान में सरकारी कार्यालयों से कुल 277.82 लाख वर्ग फीट जगह खाली कराई गई। पिछले अभियान के मुकाबले यह आंकड़ा लगभग 19 प्रतिशत अधिक है।
इस मामले में कोयला मंत्रालय ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। मंत्रालय ने 1.48 करोड़ वर्ग फीट जगह खाली कराई। लंबे समय से कार्यालयों और परिसरों में रखे अनुपयोगी सामान को हटाने से खाली हुई जगह का दूसरे कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
लाखों फाइलों की समीक्षा, हजारों शिकायतों पर कार्रवाई
विशेष अभियान में प्रशासनिक कामकाज को व्यवस्थित करने के लिए फाइलों की छंटाई और शिकायतों के निपटारे पर भी जोर दिया गया।
इस दौरान 9,99,168 जन शिकायतों का निपटारा किया गया, जबकि 40,878 अपीलों पर कार्रवाई हुई। भौतिक फाइलों की बात करें तो कुल 26,79,875 फाइलों की समीक्षा की गई। इनमें से 15,76,828 फाइलें हटा दी गईं।
डिजिटल रिकॉर्ड में भी बड़ी संख्या में फाइलों की जांच हुई। कुल 9,58,864 ई-फाइलों की समीक्षा की गई और इनमें से 7,01,723 फाइलें बंद की गईं।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य सरकारी दफ्तरों में पुराने और अनावश्यक रिकॉर्ड को कम करना तथा कामकाज को अधिक व्यवस्थित बनाना था।
स्कूल शिक्षा और महिला-बाल विकास विभाग की भागीदारी
सफाई अभियान में स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने सबसे अधिक सक्रियता दिखाई। विभाग ने 7.01 लाख से ज्यादा स्थानों पर सफाई अभियान चलाया और इस मामले में पहला स्थान हासिल किया।
वहीं महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 6.52 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों और अन्य संस्थानों में स्वच्छता गतिविधियां संचालित कीं।
कुल मिलाकर विशेष स्वच्छता अभियान 6.0 में सफाई के साथ-साथ आर्थिक और प्रशासनिक स्तर पर भी बड़े आंकड़े सामने आए। सरकारी विभागों ने कबाड़ बेचकर करीब 970 करोड़ रुपये जुटाए, जबकि रेलवे इस कमाई में सबसे बड़ा योगदान देने वाला विभाग बना।
