दिवाली के दौरान आतिशबाजी से हवा में सूक्ष्म कणों की मात्रा बढ़ सकती है।
दिवाली पर आसमान रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाता है, लेकिन इसी आतिशबाजी का धुआं हवा की गुणवत्ता को खतरनाक स्तर तक पहुंचा सकता है। हरियाणा में त्योहार के दौरान करीब 145 टन पटाखे जलाए जाने का अनुमान है। इससे निकलने वाले महीन कण हवा में घुलकर लोगों की सांसों के लिए परेशानी पैदा करते हैं। खास चिंता की बात यह है कि ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल के नियमों के बावजूद बाजार और सड़कों पर प्रतिबंधित पटाखों का इस्तेमाल पूरी तरह रुक नहीं पाया है।
पिछले वर्षों के आंकड़े भी इस खतरे की तस्वीर दिखाते हैं। वर्ष 2025 में जींद का वायु गुणवत्ता सूचकांक दिवाली से तीन दिन पहले 364 था, जो दिवाली के अगले दिन बढ़कर 421 पहुंच गया। वर्ष 2024 में भी दिवाली के अगले दिन एक्यूआई 336 दर्ज किया गया था, जबकि उससे तीन दिन पहले यह 270 था।
पांच साल के आंकड़ों में प्रदूषण की गंभीर तस्वीर
हरियाणा के अलग-अलग शहरों में दिवाली के आसपास वायु गुणवत्ता का स्तर कई बार बेहद खराब रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 में जींद का एक्यूआई 490 दर्ज किया गया था। वर्ष 2022 में गुरुग्राम का एक्यूआई 322 और 2023 में रोहतक का 383 रहा। वर्ष 2024 में जींद में यह 336 और 2025 में 421 तक पहुंच गया।
इन आंकड़ों से साफ है कि आतिशबाजी के बाद हवा की गुणवत्ता पर दबाव बढ़ता है। हालांकि, एक्यूआई में बदलाव के पीछे दूसरे प्रदूषण स्रोत भी हो सकते हैं, लेकिन पटाखों से निकलने वाला धुआं त्योहार के दौरान प्रदूषण की समस्या को और गंभीर बना सकता है।
प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री रोकना बड़ी चुनौती
प्रशासन की ओर से दिवाली से लगभग 15 दिन पहले ही पटाखों को लेकर नियम लागू कर दिए जाते हैं। ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल और आतिशबाजी के समय पर पाबंदी का उद्देश्य वायु तथा ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना है। इसके बावजूद नियमों का पालन करवाना अधिकारियों के लिए चुनौती बना रहता है।
वर्ष 2025 में गुरुग्राम और फरीदाबाद में संयुक्त कार्रवाई के दौरान 16 अक्तूबर तक 1,112.7 किलोग्राम प्रतिबंधित पटाखे जब्त किए गए थे। इस कार्रवाई में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद भी अवैध पटाखों के खिलाफ कार्रवाई जारी रही।
हरियाणा पुलिस के नियमों के अनुसार, अवैध पटाखों का भंडारण करने और निर्धारित समय के बाद आतिशबाजी करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सकती है और गिरफ्तारी भी हो सकती है। डीजीपी अजय सिंघल ने सभी पुलिस कमिश्नरों, एसपी और संबंधित अधिकारियों को ऐसे मामलों पर निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
145 टन पटाखे जलने से निकलेंगे लाखों नहीं, टनों सूक्ष्म कण
पीजीआई चंडीगढ़ के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. रवींद्र खैवाल के अनुसार, हरियाणा में त्योहारी सीजन में करीब 145 टन पटाखे जलाए जाते हैं। इनमें लड़ियां, बम, अनार, फुलझड़ी, चकरी और रॉकेट शामिल हैं। ग्रीन पटाखों की मात्रा नगण्य बताई गई है।
वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर प्रति किलोग्राम पटाखे जलने से करीब 33.6 ग्राम पीएम 2.5 और 42.5 ग्राम पीएम 10 उत्सर्जित हो सकता है। इसी अनुमान के मुताबिक, 145 टन पटाखों से लगभग 4.87 टन पीएम 2.5 और 6.16 टन पीएम 10 हवा में फैल सकता है।
जींद, फरीदाबाद, गुरुग्राम, रोहतक, धारूहेड़ा, पानीपत और करनाल में सबसे अधिक पटाखे जलाए जाने की बात सामने आई है। इनके धुएं के साथ सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और बेरियम तथा स्ट्रोंटियम जैसी धातुओं के कण भी वातावरण में पहुंच सकते हैं।
फेफड़ों से लेकर दिल तक पहुंच सकता है प्रदूषण का असर
डॉ. रवींद्र खैवाल के मुताबिक, पीएम 2.5 के कण बेहद छोटे होते हैं। ये फेफड़ों के भीतर गहराई तक पहुंचकर रक्त में मिल सकते हैं। दूसरी ओर, पीएम 10 सांस तंत्र में पहुंचकर खांसी, एलर्जी और सांस लेने में परेशानी बढ़ा सकते हैं।
पटाखों से निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी गैसें भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हैं। अस्थमा, हृदय और फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों को इनका ज्यादा खतरा रहता है। बच्चों और बुजुर्गों को भी प्रदूषित हवा से विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
150 डेसिबल तक पहुंच सकती है पटाखों की आवाज
पटाखों का असर केवल हवा पर नहीं पड़ता। तेज धमाकों से ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ता है। पटाखों की आवाज 120 से 150 डेसिबल तक पहुंच सकती है। इससे कानों में घंटी बजने, सुनने की क्षमता प्रभावित होने और मानसिक तनाव जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
तेज धमाकों से पशु-पक्षी भी प्रभावित होते हैं। उनके लिए अचानक होने वाली तेज आवाज डर और तनाव का कारण बन सकती है। वहीं, पटाखों का धुआं पेड़-पौधों, मिट्टी और जलस्रोतों को भी नुकसान पहुंचाता है।
हरियाणा में 100 करोड़ रुपये का पटाखा कारोबार
प्रदेश में पटाखों का सालाना कारोबार करीब 100 करोड़ रुपये का है। हरियाणा में पटाखा निर्माण के लिए 22 लाइसेंसधारी फैक्टरियां और 21 पंजीकृत गोदाम हैं। इन इकाइयों में केवल रोशनी वाले हल्के पटाखों के निर्माण की अनुमति है।
विशेषज्ञ बोले- सिर्फ आदेश नहीं, पालन भी जरूरी
एनवायर कैटालिस्ट्स के संस्थापक और प्रमुख विश्लेषक सुनील दहिया के मुताबिक, सरकार को पटाखे जलाने के लिए समय और स्थान तय करने चाहिए। बाजार में केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री सुनिश्चित होनी चाहिए, जिनसे कम धुआं और कम आवाज निकलती है।
उन्होंने प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाने, प्रदूषण और ध्वनि स्तर की लगातार निगरानी करने तथा नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना लगाने की जरूरत बताई। इसके साथ स्कूलों, बाजारों और रिहायशी कॉलोनियों में जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया, ताकि लोग सुरक्षित तरीके से त्योहार मना सकें।
