JNU में बिमोल अकोइजम की बर्खास्तगी पर शिक्षक संघ ने सवाल उठाए, भाजपा ने कांग्रेस को घेरा।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कांग्रेस सांसद और पूर्व प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम की बर्खास्तगी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। छात्राओं की ओर से यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने और विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब शिक्षक संघ ने बर्खास्तगी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर भाजपा ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस नेतृत्व को घेरा है।
दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर 2026 को विश्वविद्यालय के चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर की शिकायत के आधार पर अकोइजम के खिलाफ FIR दर्ज की। मामले की जांच जारी है।
9 अक्टूबर को JNU ने की थी बर्खास्तगी
JNU प्रशासन ने आंतरिक शिकायत समिति की जांच के बाद 9 अक्टूबर को प्रोफेसर बिमोल अकोइजम को विश्वविद्यालय की सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया था।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, शिकायत समिति की रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद यह कार्रवाई की गई।
वहीं, अकोइजम ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को खारिज किया है और बर्खास्तगी की प्रक्रिया को अनुचित बताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन की आलोचना की है।
शिक्षक संघ ने कार्यकारी परिषद की भूमिका पर उठाए सवाल
JNU शिक्षक संघ (JNUTA) ने बर्खास्तगी आदेश की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। संघ का कहना है कि विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार किसी शिक्षक को सेवा से हटाने में कार्यकारी परिषद की भूमिका महत्वपूर्ण है।
शिक्षक संघ ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया और संबंधित दस्तावेजों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल हैं।
हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कार्यकारी परिषद में रिपोर्ट पर विचार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में दोनों पक्षों के दावों का अंतिम मूल्यांकन संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही किया जा सकता है।
शिकायत समिति की जानकारी सार्वजनिक होने पर आपत्ति
JNUTA ने यौन उत्पीड़न की शिकायत से संबंधित आंतरिक समिति की सिफारिशों के मीडिया में सामने आने पर भी चिंता जताई है।
संघ का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में शिकायतकर्ताओं की गोपनीयता बनाए रखना और निष्पक्ष प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।
शिक्षक संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है।
बिमोल अकोइजम ने आरोपों से किया इनकार
बर्खास्तगी के बाद बिमोल अकोइजम ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि जांच प्रक्रिया में उनके पक्ष को लेकर गलत जानकारी प्रस्तुत की गई और उनके साथ अनुचित व्यवहार हुआ।
अकोइजम ने अपने खिलाफ की गई कार्रवाई को राजनीतिक और संस्थागत प्रताड़ना बताते हुए इसका विरोध किया है।
उनके इन दावों और विश्वविद्यालय प्रशासन के पक्ष को अलग-अलग रूप में देखना जरूरी है। मामले में पुलिस जांच जारी है।
भाजपा महिला मोर्चा ने किया प्रदर्शन
इस मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। भाजपा महिला मोर्चा ने कांग्रेस सांसद पर लगे आरोपों को लेकर प्रदर्शन किया और कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांगा।
भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। वहीं, यह राजनीतिक आरोप है और इसे आरोपों की न्यायिक पुष्टि के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
पुलिस जांच और विश्वविद्यालय की प्रक्रिया पर नजर
इस पूरे मामले में अब दिल्ली पुलिस की जांच, विश्वविद्यालय की बर्खास्तगी प्रक्रिया और शिक्षक संघ की आपत्तियां तीन महत्वपूर्ण पहलू हैं।
जहां विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंतरिक जांच के आधार पर कार्रवाई की है, वहीं आरोपी सांसद ने आरोपों और प्रक्रिया का विरोध किया है।
मामले में किसी आपराधिक आरोप पर अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।
