राजबीर घुम्मन को अंतरिम राहत, लेकिन CBI की FIR बरकरार।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुम्मन को कथित भ्रष्टाचार मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। अदालत ने CBI को फिलहाल कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने FIR पर रोक नहीं लगाई है और जांच जारी रहेगी।
यह मामला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के उस निर्देश से जुड़ा है, जिसमें CBI को कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए मामला दर्ज करने और दो महीने के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया था।
पंजाब सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के CBI जांच के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 12 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने मामले में नोटिस जारी किया और CBI को फिलहाल आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया।
इस आदेश से राजबीर घुम्मन को अंतरिम राहत मिली है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उनके खिलाफ दर्ज FIR रद्द हो गई है या आरोपों पर अंतिम फैसला हो चुका है।
ED के इनपुट से शुरू हुई जांच
मामले की शुरुआत प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पंजाब में कथित भ्रष्टाचार और सरकारी निर्णयों को प्रभावित करने से संबंधित जानकारी साझा किए जाने के बाद हुई। जांच में सरकारी अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, नीतिगत निर्णय, टेंडर, लाइसेंस और जमीन से जुड़े मामलों में कथित लेन-देन की पड़ताल की जा रही है।
CBI ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देश के बाद 5 अक्टूबर 2026 को FIR दर्ज की थी।
FIR में छह लोगों के नाम
FIR में राजबीर सिंह घुम्मन के अलावा नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, डॉ. रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर सिंह और राजदीप सिंह नागरा उर्फ आरएस नागरा के नाम शामिल हैं।
जांच में सितंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच पंजाब के 20 विभागों में 21 ट्रांसफर-पोस्टिंग मामलों में कथित हस्तक्षेप सहित कई अन्य पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। इन आरोपों की सत्यता जांच पूरी होने और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।
पूछताछ के लिए भेजे गए थे समन
रिपोर्टों के अनुसार, CBI ने राजबीर घुम्मन को पूछताछ के लिए दो बार समन भेजे थे। उन्हें चंडीगढ़ में पेश होने के लिए कहा गया था। बाद में सेक्टर-30 स्थित CBI कार्यालय में उपस्थित होने के लिए दूसरा नोटिस भी भेजा गया।
घुम्मन की ओर से पेशी के बजाय कानूनी जवाब भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई थी। जांच एजेंसी ने मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय और संगरूर स्थित आवास पर नोटिस चस्पा किए जाने की कार्रवाई भी की थी।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद मामले में दो बातें महत्वपूर्ण हैं। पहली, CBI की FIR और जांच जारी है। दूसरी, अदालत के निर्देश के अनुसार फिलहाल कठोर कार्रवाई नहीं की जानी है।
आगे की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट पंजाब सरकार की याचिका और हाई कोर्ट के CBI जांच के आदेश पर विचार करेगा। तब तक इस मामले में लगाए गए आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
