मानसा में मेडिकल स्टोर पर विवाद के बाद हुई गोलीबारी में परविंदर सिंह झोटा की मौत के मामले की जांच जारी है।
पंजाब की मानसा से सामने आई गोलीबारी की घटना ने इलाके में तनाव पैदा कर दिया है। नशे की बिक्री के खिलाफ अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा की एक मेडिकल स्टोर संचालक के साथ विवाद के बाद गोली लगने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि घटना के समय परविंदर सोशल मीडिया पर लाइव थे, जिसके कारण वारदात का घटनाक्रम वीडियो में दर्ज हो गया।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
जानकारी के अनुसार, घटना सुबह करीब 9 बजे मानसा शहर के रेलवे फाटक के पास हुई। परविंदर सिंह झोटा एक मेडिकल स्टोर संचालक अश्विनी के पास पहुंचे थे। वहां कथित तौर पर मेडिकल स्टोर से नशे की बिक्री को लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई।
बताया गया है कि विवाद बढ़ने पर मेडिकल स्टोर संचालक ने अपनी पिस्तौल निकाल ली। इसके बाद बहस और तीखी हो गई। आरोप है कि इसी दौरान परविंदर सिंह झोटा पर गोलियां चलाई गईं। घटना की परिस्थितियों और गोली चलाने की भूमिका की पुष्टि पुलिस जांच से होनी है।
अस्पताल ले जाने के बावजूद नहीं बची जान
गोली लगने के बाद परविंदर मौके से भागकर पास की एक दुकान में जा गिरे। आसपास के लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्हें तीन गोलियां लगी थीं। दो गोलियां पेट में और एक टांग में लगी थी। गोलीबारी में छर्रे लगने से कुछ अन्य लोग भी घायल हुए हैं। घायलों के रूप में हैप्पी, कुलविंदर सिंह, बलदेव सिंह और गोविंद सिंह के नाम बताए गए हैं। उनका सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा है।
घटना के बाद अस्पताल में प्रदर्शन
परविंदर की मौत के बाद उनके परिवार और सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने अस्पताल पहुंचकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और जल्द न्याय की मांग की।
इस घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बताई जा रही है। लोगों के बीच नशे की बिक्री पर नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता सामने आई है।
पुलिस जांच में किन बातों पर रहेगा ध्यान?
डीएसपी हरजिंदर सिंह के मौके पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। पुलिस घटना के क्रम, मेडिकल स्टोर पर हुए विवाद और गोलीबारी से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।
इस मामले में सोशल मीडिया लाइव वीडियो घटनाक्रम को समझने के लिए अहम साक्ष्य हो सकता है, बशर्ते पुलिस उसकी प्रामाणिकता और पूरी रिकॉर्डिंग की पुष्टि करे। वीडियो में दिखाई देने वाली बातों को जांच के निष्कर्ष से पहले अंतिम सबूत या दोष सिद्ध होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
फिलहाल, परविंदर सिंह झोटा की मौत के मामले में पुलिस जांच और आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी। जांच के बाद ही घटना की पूरी परिस्थितियों और जिम्मेदार लोगों के बारे में स्पष्ट स्थिति सामने आएगी।
