Punjab Assembly discusses Yamuna water rights and possible legal action in Supreme Court
पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के अंतिम दिन राज्य के जल अधिकारों को लेकर सरकार ने कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे। सिंचाई मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने यमुना नदी के पानी पर पंजाब के अधिकार का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।
सरकार ने कहा कि यदि केंद्र की ओर से पंजाब की शिकायत पर उचित निर्णय नहीं लिया जाता है तो राज्य अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है।
यमुना जल पर पंजाब ने रखा अपना पक्ष
बरिंदर गोयल ने कहा कि 1966 में पंजाब के पुनर्गठन से पहले यमुना अविभाजित पंजाब का हिस्सा रही है। इसी आधार पर सरकार ने यमुना के पानी को लेकर पंजाब के ऐतिहासिक और कानूनी अधिकार का मुद्दा उठाया।
प्रस्ताव में केंद्र के जल शक्ति मंत्रालय से 25 अप्रैल 2025 को पंजाब द्वारा दायर शिकायत पर जल्द फैसला लेने की मांग की गई।
इसके साथ ही सरकार ने Water Dispute Tribunal गठित करने की मांग भी रखी है। केंद्र से फैसला नहीं आने पर सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प प्रस्ताव में रखा गया है।
राजस्थान को दिए पानी का भुगतान मांगा
सदन में राजस्थान को दिए जा रहे पानी की कीमत पंजाब को देने की मांग भी उठी। सरकार ने कहा कि पंजाब खुद जल संकट से जूझ रहा है, इसलिए राज्य के जल संसाधनों को लेकर आर्थिक और कानूनी अधिकारों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
उझ परियोजना को जल्द पूरा करने की मांग
सरकार ने उझ बहुउद्देशीय परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की भी मांग की। सरकार का तर्क है कि इससे वर्तमान में रावी के रास्ते आगे जाने वाले पानी के एक हिस्से का पंजाब की जरूरतों के लिए उपयोग किया जा सकेगा।
मुफ्त बिजली और कल्याणकारी योजनाओं पर भी प्रस्ताव
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मुख्यमंत्री माताएं-धीयां योजना, हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली, खेतीबाड़ी के लिए मुफ्त बिजली, मुख्यमंत्री सेहत योजना, आम आदमी क्लीनिक, महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा, तीर्थ यात्रा योजना और डेयरी से जुड़ी वित्तीय योजनाओं को जारी रखने का प्रस्ताव पेश किया।
इन योजनाओं के लिए पंजाब के बजट में प्रावधान रखने की बात कही गई।
मिड-डे मील का मुद्दा भी उठा
AAP विधायक कुलवंत सिंह ने नर्सरी और LKG के बच्चों को मिड-डे मील नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। इस पर मंत्री ने बताया कि प्री-प्राइमरी वन और प्री-प्राइमरी टू की व्यवस्था है और केंद्र के नियमों में बदलाव के कारण इस संबंध में दिक्कत आ रही है।
सरकार ने कहा कि उसका प्रयास है कि सभी पात्र बच्चों को भोजन की सुविधा मिले।
राणा गुरजीत का बयान भी चर्चा में
विधानसभा के बाहर कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह ने भाजपा या अकाली दल में शामिल होने की चर्चाओं पर तंज कसते हुए कहा, “मित्रां दा न चलदा है।” भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता से मुलाकात के सवाल पर उन्होंने भी पलटकर सवाल किया कि “भाजपा का सीनियर लीडर है कौन?”
अपने बेटे को लेकर उन्होंने कहा कि वह आजाद है, लेकिन उसकी सोच कांग्रेस वाली है।
