पंजाब में आगामी चुनाव से पहले भाजपा और अकाली दल के दोबारा गठबंधन की अटकलें लगाई जा रही हैं।
पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। लंबे समय तक एक-दूसरे के सहयोगी रहे भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के फिर से साथ आने की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत चल रही है और सीटों के बंटवारे पर भी विचार किया जा रहा है।
सूत्रों का दावा है कि दिवाली के बाद दोनों पार्टियां गठबंधन को लेकर बड़ा ऐलान कर सकती हैं। संभावित समझौते में भाजपा को 45 से 50 सीटें मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि, अभी तक किसी भी पार्टी ने इस फॉर्मूले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
कृषि कानूनों के विवाद के बाद अलग हुए थे दोनों दल
भाजपा और अकाली दल की पंजाब में पुरानी राजनीतिक साझेदारी रही है। दोनों दलों ने लंबे समय तक गठबंधन के तहत चुनाव लड़े और राज्य की राजनीति में मिलकर काम किया।
लेकिन साल 2020 में कृषि कानूनों को लेकर दोनों पार्टियों के रिश्तों में खटास आ गई थी। सितंबर 2020 में शिरोमणि अकाली दल ने NDA से अलग होने का फैसला किया। इसके बाद भाजपा और अकाली दल ने अपनी-अपनी चुनावी रणनीति के तहत अलग रास्ते अपनाए।
अब आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पुराने सहयोगियों के बीच दोबारा नजदीकी बढ़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं। अगर दोनों दल फिर से गठबंधन करते हैं तो पंजाब की राजनीति में एक नया चुनावी समीकरण बन सकता है।
भाजपा की बढ़ती सीटों की मांग पर सबकी नजर
इस संभावित समझौते में सीटों का बंटवारा सबसे महत्वपूर्ण पहलू बनकर सामने आ रहा है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, भाजपा को 117 विधानसभा सीटों में से 45 से 50 सीटें दी जा सकती हैं।
यह संख्या गठबंधन की स्थिति में भाजपा की भूमिका को पहले के मुकाबले अधिक मजबूत बना सकती है। हालांकि, पार्टी की ओर से पहले सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी का सार्वजनिक रुख सामने आता रहा है।
ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि यदि अकाली दल के साथ समझौता होता है तो भाजपा सीटों के मामले में क्या फैसला लेती है। फिलहाल 45 से 50 सीटों का आंकड़ा सूत्रों पर आधारित है, इसे अंतिम सीट बंटवारा नहीं माना जा सकता।
अमित शाह के पंजाब में NDA सरकार वाले बयान की चर्चा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कई बार पंजाब में NDA की सरकार बनाने का लक्ष्य सामने रख चुके हैं। उनके इन बयानों को राज्य में भाजपा की राजनीतिक रणनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
इसी बीच भाजपा के एक वरिष्ठ नेता की ओर से अकाली दल के साथ गठबंधन की संभावनाओं पर सकारात्मक संकेत मिलने की बात भी सामने आई है। इन घटनाक्रमों के कारण दोनों दलों के बीच संभावित समझौते की चर्चा और तेज हो गई है।
हालांकि, किसी भी गठबंधन को लेकर अंतिम स्थिति दोनों पार्टियों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
बठिंडा में हो सकता है गठबंधन का ऐलान?
राजनीतिक चर्चाओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित पंजाब दौरे का जिक्र भी हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यदि भाजपा और अकाली दल के बीच समझौता अंतिम रूप लेता है तो प्रधानमंत्री मोदी बठिंडा जा सकते हैं।
अटकलें हैं कि बठिंडा में किसी कार्यक्रम के दौरान दोनों दल गठबंधन की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक तारीख या कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है।
इसलिए फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक कार्यक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है।
अकाली दल से अलग हुए गुट के साथ गठबंधन की चर्चा क्यों कमजोर?
NDA के संभावित विस्तार को लेकर अकाली दल से अलग हुए एक गुट के साथ समझौते की संभावना पर भी चर्चा हुई थी। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, इस विकल्प को फिलहाल कम संभावित माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि इस गुट के पास अलग पंजीकृत राजनीतिक दल और चुनाव चिह्न नहीं है। इसी वजह से उसके नेताओं की चुनावी भूमिका और गठबंधन में संभावित भागीदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
दिवाली के बाद साफ हो सकती है राजनीतिक तस्वीर
पंजाब में भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन की चर्चा ने आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ा दी हैं। भाजपा के लिए अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव अहम हो सकता है, जबकि अकाली दल के सामने पुराने सहयोगी के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरने का विकल्प है।
अब राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या दिवाली के बाद दोनों दल औपचारिक रूप से गठबंधन का ऐलान करेंगे? क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बठिंडा पहुंचकर इस समझौते की घोषणा करेंगे?
इन सभी सवालों पर अभी आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है। फिलहाल गठबंधन और सीटों के बंटवारे से जुड़ी जानकारी राजनीतिक सूत्रों के हवाले से सामने आ रही है।
