चंडीगढ़ में आयोजित भाजपा के कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद वक्ता और महिलाएं।
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच 1984 की सिख विरोधी हिंसा का मुद्दा फिर चर्चा में है। बुधवार, 4 नवंबर को चंडीगढ़ में भाजपा ने ‘जख्म 84 दे’ नाम से सम्मेलन और फोटो प्रदर्शनी आयोजित की। कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस और राहुल गांधी को लेकर सवाल उठाए। इस दौरान प्रदर्शनी में लगी तस्वीरों को देखकर एक महिला भावुक हो गईं और मंच पर रोने लगीं।
भाजपा के इस आयोजन में 1984 की हिंसा के पीड़ितों, प्रत्यक्षदर्शियों, कानूनी विशेषज्ञों और राजनीतिक नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश की गई। पार्टी ने कहा कि इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को उस त्रासदी और पीड़ित परिवारों की लंबी न्यायिक लड़ाई से परिचित कराना है।
एक ही दिन आमने-सामने आए कांग्रेस और BJP के कार्यक्रम
‘जख्म 84 दे’ सम्मेलन उस दिन आयोजित हुआ, जब राहुल गांधी संगरूर में कांग्रेस की ‘इंसाफ रैली’ को संबोधित करने पहुंचे। कांग्रेस की रैली को पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव के अभियान की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
इसी बीच भाजपा ने 1984 की हिंसा को लेकर कांग्रेस से जवाबदेही की मांग उठाई। पार्टी नेताओं ने सवाल किया कि पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने में दशकों क्यों लगे और इस मामले से जुड़े सवालों का जवाब कौन देगा।
रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस नेतृत्व पर साधा निशाना
सम्मेलन के मुख्य संबोधन में रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस और राहुल गांधी को लेकर सवाल उठाए। भाजपा के अनुसार, प्रसाद 1984 की हिंसा से जुड़े मामलों में पीड़ितों की ओर से अदालतों में पैरवी कर चुके हैं।
सम्मेलन में हिंसा के प्रत्यक्षदर्शियों और प्रभावित परिवारों के सदस्यों ने अपने अनुभव साझा किए। अलग-अलग सत्रों में कथित जांच संबंधी खामियों, बंद मामलों की दोबारा जांच, दोषियों को सजा दिलाने के लिए चली कानूनी लड़ाई और पीड़ित परिवारों के पुनर्वास पर चर्चा की गई।
फोटो प्रदर्शनी में दिखी पीड़ितों की पीड़ा
कार्यक्रम की शुरुआत 1984 की हिंसा से जुड़ी तस्वीरों की प्रदर्शनी से हुई। तस्वीरों में उस दौर की घटनाओं और प्रभावित लोगों की पीड़ा को सामने रखने का प्रयास किया गया।
इसी प्रदर्शनी को देखते हुए एक महिला भावुक हो गईं। वह मंच पर बैठी थीं और उनकी आंखों से आंसू निकल आए। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए भी यह पल भावुक कर देने वाला रहा।
पंजाब की राजनीति में फिर उठा 1984 का सवाल
भाजपा ने सम्मेलन के जरिए 1984 की हिंसा, पीड़ित परिवारों के संघर्ष और न्याय की प्रक्रिया को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रखा। दूसरी ओर, कांग्रेस ने संगरूर की रैली के माध्यम से पंजाब के मौजूदा मुद्दों और अपनी चुनावी तैयारियों पर जोर दिया।
दोनों दलों के एक ही दिन हुए कार्यक्रमों ने राज्य में 1984 की हिंसा और राजनीतिक जवाबदेही से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे पर दोनों पार्टियों के बीच बयानबाजी आगे भी जारी रह सकती है।
