कथित वोट चोरी और चुनावी प्रक्रिया के मुद्दे पर विपक्ष की मांगों के बीच CJI सूर्यकांत का बयान।
कथित वोट चोरी और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष और चुनावी व्यवस्था से जुड़े संस्थानों के बीच बहस के बीच राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट मार्च के ऐलान ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। इस बीच भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने मीडिया के सामने मुलाकात के अनुरोध पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
CJI सूर्यकांत ने कहा कि उन्हें मुलाकात के लिए पत्र मिला था और उन्होंने उसी रात उसका जवाब दे दिया था। उन्होंने बताया कि जवाब में मुलाकात नहीं कर पाने के कारणों का उल्लेख किया गया था।
विपक्ष की क्या हैं प्रमुख मांगें?
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर सोमवार शाम 4 से 5 बजे के बीच मिलने का समय मांगा था। विपक्षी नेता इस दौरान एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे।
ज्ञापन में बताई गई मांगों में कथित वोट चोरी को रोकना, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, SIR प्रक्रिया रोकना और मतपत्र प्रणाली पर लौटना शामिल था।
इन मांगों के जरिए विपक्ष ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े अपने सवालों को सामने रखने की कोशिश की।
CJI ने मुलाकात से जुड़े सवाल पर क्या बताया?
जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि उन्हें अनुरोध संबंधी पत्र मिला था और उसका जवाब पहले ही भेज दिया गया था। उन्होंने अपने जवाब में मुलाकात नहीं कर पाने के कारणों का उल्लेख किए जाने की बात कही।
मुलाकात को लेकर सामने आए घटनाक्रम के बीच राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के नेताओं के प्रस्तावित मार्च पर सबकी नजरें टिकी हैं।
‘सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले’ बयान क्यों अहम?
मुख्य न्यायाधीश का यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्षी नेता चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए उनसे मिलने का प्रयास कर रहे थे। हालांकि, न्यायालय के समक्ष किसी मुद्दे को उठाने की प्रक्रिया और मुख्य न्यायाधीश के साथ व्यक्तिगत मुलाकात अलग विषय हैं।
इसलिए CJI के बयान को किसी मामले पर न्यायिक निष्कर्ष या विपक्ष की मांगों पर अदालत के फैसले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर भी उठाया हितों के टकराव का मुद्दा
जस्टिस सूर्यकांत ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के सुप्रीम कोर्ट दौरे को रद्द किए जाने के संबंध में भी बात की।
उन्होंने कहा कि इस मामले में हितों के टकराव की संभावना पर विचार किया गया था। उनके अनुसार, वरिष्ठ न्यायिक सहयोगियों और उनकी सामूहिक राय थी कि हितों के टकराव की किसी भी स्थिति से बचना चाहिए। इस कारण प्रशासनिक पहलुओं पर चर्चा की गई।
आगे क्या होगा?
राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के नेताओं के मार्च का ऐलान चुनावी प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच हुआ है। विपक्ष की मांगों, मुख्य न्यायाधीश के जवाब और प्रस्तावित मार्च के घटनाक्रम पर आगे की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी।
फिलहाल, इस पूरे मामले में कथित वोट चोरी के आरोपों को विपक्ष की मांगों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इन आरोपों को किसी न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य के तौर पर प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
